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बंद कमरों से नहीं, अब स्कूलों से सीधे फीडबैक लेकर सुधरेगी परीक्षा प्रणाली, डॉ. राजेश ने दो स्कूलों का किया दौरा
HPBOSE: हिमाचल प्रदेश में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को अब और अधिक पारदर्शी, सरल और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की तैयारी है। इसके लिए नीतियां अब केवल मुख्यालयों में नहीं बनेंगी, बल्कि स्कूलों के जमीनी फीडबैक के आधार पर तय होंगी। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए धर्मशाला के दो स्कूलों का दौरा किया और शिक्षकों व विद्यार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सीधे संवाद से मिलने वाले सुझावों के आधार पर ही बोर्ड की आगामी कार्यप्रणाली में बड़े सुधार किए जाएंगे।
शिक्षकों से चर्चा: NEP, डिजिटल शिक्षण और मूल्यांकन पर जोर
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने राजकीय उच्च विद्यालय (बॉयज) धर्मशाला और गुरुकुल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दौरा कर शिक्षकों के साथ अहम बैठक की। इस दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पाठ्यक्रम लागू करने, समयबद्ध तरीके से सिलेबस पूरा करने और एनसीईआरटी (NCERT) संसाधनों के बेहतरीन उपयोग पर मंथन हुआ। आधुनिक दौर की जरूरत को देखते हुए डिजिटल और एआई (AI) आधारित शिक्षण पर भी विशेष चर्चा की गई। डॉ. शर्मा ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश देते हुए कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, आंतरिक और प्रायोगिक परीक्षाओं में गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित होनी चाहिए। साथ ही, परीक्षा ड्यूटी के दौरान ओएमआर (OMR) शीट पर सही अंकन और सीसीटीवी की निगरानी व नकल रोकने के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया।
छात्रों को सफलता का मंत्र: तनाव से बचें, सोशल मीडिया का करें संतुलित इस्तेमाल
दौरे के दौरान बोर्ड अध्यक्ष ने विद्यार्थियों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें सफलता के टिप्स दिए। उन्होंने छात्रों को परीक्षा की तैयारी, बेहतर टाइम मैनेजमेंट और उत्तर-पुस्तिका लिखने के प्रभावी तरीकों के बारे में बताया। आज के डिजिटल युग के खतरों से आगाह करते हुए डॉ. शर्मा ने युवाओं को परीक्षा के तनाव से बचने, सकारात्मक सोच रखने और मोबाइल व सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी। इसके अलावा, छात्रों के सुनहरे भविष्य के लिए करियर विकल्पों, स्कॉलरशिप योजनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
’हमारा लक्ष्य केवल परीक्षा कराना नहीं, समग्र विकास है’
इस दौरान पाठ्यपुस्तकों और परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं को लेकर सीधे सुझाव लिए गए। डॉ. राजेश शर्मा ने अपने विजन को स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य केवल परीक्षा व्यवस्था को संचालित करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी शिक्षा और मूल्यांकन प्रणाली विकसित करना है जो विद्यार्थी के ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास को मजबूत करे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि बोर्ड और विद्यालयों के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, शिक्षा व्यवस्था उतनी ही बेहतर होगी। उन्होंने संकल्प दोहराया कि भविष्य में बोर्ड द्वारा तकनीक और सरलता की दिशा में किए जाने वाले हर सुधार के केंद्र में ‘हिमाचल का विद्यार्थी’ ही होगा।
अमित महाजन
