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FSSAI का बड़ा एक्शन: ‘एंटीक्विटी’, ‘रॉयल चैलेंज’ और ‘ओल्ड मोंक’ समेत कई मशहूर शराब ब्रांड्स पर बैन, क्या है वजह
Big action by FSSAI: देश के खाद्य सुरक्षा नियामक, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक कड़ा कदम उठाते हुए भारत में बिकने वाले कुछ सबसे लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांड्स के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। नियामक की जांच में यह गंभीर खुलासा हुआ है कि जिन शराबों में प्राकृतिक एजिंग और परिपक्वता (Maturation) से स्वाद आना चाहिए था, उनमें कंपनियां केमिकल आधारित कृत्रिम फ्लेवर (Artificial Flavors) की मिलावट कर रही थीं। यह कार्रवाई डियाजियो इंडिया की यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू बेवरेजेज तथा मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर द्वारा निर्मित शराब के चुनिंदा बैच और यूनिट्स पर की गई है। FSSAI ने इन सभी उत्पादों को ‘सब-स्टैंडर्ड’ (घटिया दर्जे का) करार दिया है।
प्रतिबंध के दायरे में आए प्रमुख ब्रांड्स और कंपनियां
FSSAI की प्रयोगशाला जांच के बाद जिन नामी कंपनियों और उनके उत्पादों पर गाज गिरी है, उनका विवरण इस प्रकार है:
यूनाइटेड स्पिरिट्स (मध्य प्रदेश प्लांट):
एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की (Antiquity Blue Whisky)
रॉयल चैलेंज व्हिस्की (Royal Challenge Whisky)
इनब्रू बेवरेजेज (मध्य प्रदेश प्लांट):
बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की (Bagpiper Deluxe Whisky)
ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम (Old Cask Deluxe XXX Rum)
मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर (महाराष्ट्र प्लांट):
ओल्ड मोंक रम (Old Monk Rum) के तीन अलग-अलग वेरिएंट्स
फिलहाल यह पाबंदी निर्दिष्ट निर्माण इकाइयों (Manufacturing Units) में तैयार की गई शराब पर लागू की गई है। देश की अन्य यूनिट्स पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
Position of FSSAI on the use of identical flavours in Alcoholic Beverages pic.twitter.com/Uex8wYv9AL
— FSSAI (@fssaiindia) August 2, 2026
मुनाफे के लिए शॉर्टकट: क्यों हुई यह कार्रवाई?
अच्छी व्हिस्की और रम की गुणवत्ता उसके इस्तेमाल किए गए प्राकृतिक कच्चे माल (जैसे शीरा, माल्ट, अंगूर) और लकड़ी के पीपों (Casks) में लंबे समय तक सहेज कर रखने (एजिंग प्रोसेस) से तय होती है। FSSAI की जांच में पाया गया कि कंपनियां प्राकृतिक एजिंग की महंगी और लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए व्हिस्की में ‘व्हिस्की फ्लेवर’ और रम में अलग से ‘रम फ्लेवर’ जैसे कृत्रिम रसायन मिला रही थीं। FSSAI ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई मान्यता प्राप्त प्रक्रिया नहीं है जहां रम या व्हिस्की में उसी का कृत्रिम फ्लेवर अलग से डाला जाए। भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत केवल प्राकृतिक स्वाद बढ़ाने वाले तत्वों के इस्तेमाल की ही इजाजत है।
एफएसएसएआई का सख्त रुख
यह कार्रवाई खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य मानकों से खिलवाड़ रोकने के लिए FSSAI द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। नियामक लगातार ऐसे उत्पादों पर नजर बनाए हुए है जो भ्रामक दावों या घटिया सामग्री का सहारा लेकर बाजार में बेचे जा रहे हैं। हाल ही में प्राधिकरण ने पेप्सी और रेड बुल जैसी दिग्गज कंपनियों को भी अत्यधिक कैफीन युक्त पेय पदार्थों को ‘एनर्जी ड्रिंक’ के रूप में प्रचारित न करने के कड़े निर्देश दिए थे।
पंकज शर्मा
