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कांगड़ा के अनमोल रत्न: पंडित बालकृष्ण शर्मा और उनकी सेवा-विरासत-एक जीवित संस्थान, एक अमर पहचान
Pandit Balkrishna Sharma: कांगड़ा की माटी की बात जब भी छिड़ती है, पंडित बालकृष्ण शर्मा की पावन स्मृति अपने आप दिलो-दिमाग में तैरने लगती है। पंडित बालकृष्ण शर्मा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने आप में एक जीवित संस्थान और कांगड़ा के अटूट स्वाभिमान थे। उनका पूरा जीवन कांगड़ा के विकास, उसकी परंपराओं और यहाँ के लोगों की सेवा में समर्पित रहा। नगरवासियों ने भी उन्हें जो असीम स्नेह और सम्मान दिया, उसी की बदौलत कांगड़ा उनके लिए महज़ एक शहर नहीं, बल्कि उनका अपना परिवार बन गया। आज भले ही वे सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, पर कांगड़ा का हर कोना और यहाँ की हवा आज भी उनकी अमिट छापों की गवाही देती है।
छोटे स्केल पर बर्तनों का व्यापार शुरू किया
पंडित बालकृष्ण शर्मा का जन्म जिला ऊना के लौहारा गांव में पंडित जय राम शर्मा के यहां 22 जनवरी, 1944 को हुआ। सच मायनों में यह गांव उसी दिन गौरवान्वित हुआ क्योंकि आगे चलकर प्रसिद्धि की पराकाष्ठा इसी बालक के हिस्से में आई। कालांतर में उनके पिता लौहारा गांव से कांगड़ा आए और यहां उन्होंने छोटे स्केल पर बर्तनों का व्यापार शुरू किया। विभिन्न प्रतिभाओं के पंडित बालकृष्ण शर्मा को अपनी पहचान बनाने में देर नहीं लगी। हालांकि शुरुआत भले ही जीरो ग्राउंड से हुई थी, पर देखते ही देखते पूरे कारोबार का परिदृश्य ही बदल गया। 9 सितंबर, 2007 को यह महान विभूति हमारे बीच नहीं रही, पर जो आदर्श पंडित बालकृष्ण शर्मा ने स्थापित किए वे मील का पत्थर साबित हुए हैं।
आर्थिक तौर पर कमजोर रहे लोगों की सेवा करते आए हैं डॉ राजेश
पंडित बालकृष्ण शर्मा के सुपुत्र डॉ राजेश शर्मा हिमाचल के कांगड़ा में श्री बालाजी मल्टी स्पेशलिटी नाम से अस्पताल एवं नर्सिंग कॉलेज का संचालन करते हैं। इसके अलावा वह मल्टीपल बिजनेस भी हैंडल करते हैं। डॉ राजेश शर्मा अपने पिता पंडित बालकृष्ण शर्मा के नाम पर एक ट्रस्ट का भी संचालन करते हैं। इसी तरह डॉ राजेश शर्मा कई सामाजिक संस्थाओं का भी दायित्व निभा रहे हैं। डॉ राजेश हिमाचल हॉकी के भी वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं। समाज सेवा से जुड़े डॉ राजेश शर्मा हमेशा ही आर्थिक तौर पर कमजोर रहे लोगों की सेवा करते आए हैं। वर्तमान में उन्हें सरकार ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड का चेयरमैन बनाया है। डॉ राजेश शर्मा ने शिक्षा बोर्ड में एक वर्ष के भीतर एक आयाम स्थापित किए हैं।
-राहुल कुमार
