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In Depth: पहले Negative बता घर भेजा, फिर रिपोर्ट में गड़बड़ी  कहकर 6 घंटे खेतों में बिठाया

In Depth: पहले Negative बता घर भेजा, फिर रिपोर्ट में गड़बड़ी  कहकर 6 घंटे खेतों में बिठाया

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सुंदरनगर। कोरोना वायरस (Coronavirus) से निपटने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन इसी बीच कई खामियां भी नजर आ रही हैं। सीएम जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी में स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई। सुंदरनगर की ग्राम पंचायत मलोह के 4 कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कोविड केयर सेंटर ढांकसीधार और डेडिकेटेड कोविड अस्पताल नेरचौक (Dedicated Covid Hospital Nerchowk) में चल रहा था। इनमें से 3 मरीजों को कोरोना से जंग जीतने के उपरांत पिछले सप्ताह ही घर वापस भेज दिया गया था। वहीं एक मरीज अभी भी ढांकसीधार में उपचाराधीन था, लेकिन इस मामले में  स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही इस कदर सामने आई है कि मरीज को अपने घर पहुंचने के बाद खेतों में भूखे-प्यासे बैठकर कर अपनी कोविड रिपोर्ट कन्फर्म होने तक लगभग 6 घंटे इंतजार करना पड़ा।

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2 दिन पहले उसके सैंपल (Sample) लिए गए थे और रिपोर्ट में नेगेटिव (Negative) बताया गया। इसके बाद उसे ढांकसीधार कोविड केयर सेंटर से एंबुलेंस के माध्यम से उसके गांव मलोह पहुंचाया गया, लेकिन जैसे ही एंबुलेंस से मरीज उतर कर अपने घर के लिए पैदल रवाना हुआ। इसी दौरान उसे ढांकसीधार से कॉल (Call) आया और रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी की सूचना दी गई। इस पर उक्त व्यक्ति को घर जाने से भी मना कर दिया गया साथ ही रिपोर्ट का इंतजार करने के निर्देश दिए गए। इससे मरीज घबरा गया और वह पूरा दिन घर के बाहर खेत में ही बैठा रहा। इस कारण मरीज के परिवार वाले भी परेशान होते रहे।

नेगेटिव रिपोर्ट का सर्टिफिकेट भी दे दिया गया था

उक्त व्यक्ति को नेगेटिव रिपोर्ट का सर्टिफिकेट भी दे दिया गया था, लेकिन इसके बाद जब मरीज को इस तरह का कॉल आया तो वो परेशान हो गया और अपने घर के बाहर ही दूर खेतों में बैठा रहा। जब स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी से बात की गई तो उनका कहना था कि मरीज की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। वहीं जारी की गई रिपोर्ट में मरीज की उम्र 28 वर्ष लिखी हुई थी, लेकिन उसकी उम्र 34 वर्ष थी। इस कारण भ्रम पैदा हो गया।

वहीं मामले को लेकर मलोह पंचायत के उप प्रधान कृष्ण चंद वर्मा ने कहा कि युवक को पहले तो  घर भेज दिया गया, लेकिन इसके बाद जब युवक घर से कुछ दूरी पर था तो उसे किसी अधिकारी का कॉल आया। अधिकारी ने युवक को रिपोर्ट पेंडिंग के बारे में कहा और घर नहीं जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे मरीज और उसके परिवार और आसपास के क्षेत्र के गांव वाले परेशानी में पड़ गए। सभी स्वास्थ्य विभाग (Health Deptt) इस तरह की लापरवाही पर हैरान थे। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर की बीमारी है जिससे निपटने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी इस तरह की लापरवाही बरते तो इससे लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।

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