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75 फीसदी लोग होते हैं Work Place बुलिंग का शिकार, शोध में आया सामने

75 फीसदी लोग होते हैं Work Place बुलिंग का शिकार, शोध में आया सामने

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नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (sushant Singh Rajput) की आत्महत्या (Suicide) के बाद डिप्रेशन (Depression) और भाई-भतीजावाद (Nepotism)पर सब जगह चर्चा हो रही है। सिर्फ इंडस्ट्री में नहीं, बल्कि कई अन्य जगह पर भी लोग बुलिंग का शिकार हो रहे हैं। अगर आप भी इन लोगों में एक हैं जो अपने खिलाफ ही रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से ज्यादा चुप रहना पसंद करते हैं तो यह खबर आपके काम की है क्योंकि यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह से आप वर्क प्लेस बुलिंग को रोक सकते हैं।

गंभीर भावनात्मक और मानसिक नुकसान पहुंचाता है
दरअसल, टीओआई ने फीनिक्स विश्वविद्यालय (TOI Phoenix University) से जुडिथ लिन फिशर-ब्लांडो द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत कर्मचारी अपने वर्कप्लेस पर जीवन में कभी न कभी वर्कप्लेस बुलिंग का शिकार होते हैं। वर्कप्लेस बुलिंग सहकर्मियों, अधीनस्थों, बॉस द्वारा लगातार ऐसे व्यवहार का पैटर्न है जो पीड़ित को गंभीर भावनात्मक और मानसिक नुकसान पहुंचा सकता है। बार-बार बहिष्कार, जानबूझकर हाशिए पर रखना, डाउन-रेटिंग, ऑस्ट्रैकिज्म और वर्क प्रॉजेक्ट्स का अपने हिसाब से अलॉटमेंट वास्तव में कुछ चुनिंदा व्यवहारों में से हो सकता है।


इस व्यवहार से पीड़ित चला जाता है डिप्रेशन में
ऑफिस (Office) में इस तरीके के व्यवहार से कई बार पीड़ित खुद को बेहद अलग थलग और डिप्रेशन (Depression) में महसूस करता है। वर्कप्लेस बुलिंग को रोकना वाकई काफी मुश्किल है। क्योंकि वर्कप्लेस बुलिंग अक्सर ऑफिस के मानदंडों और नियमों के भीतर ही होती है। एक्सपर्ट्स का कहते हैं कि वर्कप्लेस बुलिंग अक्सर वही लोग करते हैं जो पहले कहीं इसका शिकार हो चुके होते हैं।

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