-
Advertisement
CPS मामले पर हाईकोर्ट में बहस पूरी, अब 20 को सरकार की ओर से होगी बहस
शिमला (विधि संवाददाता)। हिमाचल प्रदेश में डिप्टी सीएम और मुख्य संसदीय सचिव (CPS) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court) में बहस पूरी हो गई है। न्यायाधीश विवेक और न्यायाधीश संदीप शर्मा की डबल बेंच (Double Bench) के सामने तीनों याचिकाकर्ताओं की तरफ से बहस पूरी हुई है। अभी हिमाचल सरकार की तरफ से बहस होना बाकी है। 20 दिसंबर को अगली सुनवाई में एडवोकेट जनरल अनूप रत्न सरकार की ओर से बहस करेंगे।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राजभवन से डिप्टी CM की शपथ से जुड़े रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लिया था। हिमाचल हाईकोर्ट CPS मामले में 3 अलग-अलग याचिकाकर्ताओं (Petitioners) की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। एक याचिका BJP के 11 विधायकों की है, जबकि दूसरी याचिका पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस संस्था तथा तीसरी याचिका कल्पना नाम की एक महिला की है। इसमें डिप्टी CM व CPS की नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए उसे खारिज (Reject) करने की मांग की गई है। याचिकाओं में हिमाचल संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुविधाएं) अधिनियम, 2006 को निरस्त करने की गुहार लगाई गई है।
हिमाचल में हैं 6 CPS
हिमाचल सरकार (Himachal Govt) ने रोहड़ू से MLA मोहन लाल ब्राक्टा, अर्की से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, दून से राम कुमार, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल को CPS बना रखा है। याचिकाओं में आरोप है कि CPS की नियुक्ति कानून के प्रावधानों के विपरीत है। यह लोग मंत्रियों के बराबर वेतन व अन्य सुविधाएं ले रहे हैं।
मंत्री और CPS की संख्या 15 फीसदी से ज्यादा
भारतीय संविधान (Indian Constitution) के अनुच्छेद 164 में किए गए संशोधन के मुताबिक किसी भी प्रदेश में मंत्रियों की संख्या विधायकों की कुल संख्या का 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रदेश में मंत्री और CPS की संख्या में 15 फीसदी से ज्यादा हो गई है।
यह भी पढ़े:हमें DA और एरियर दें तो हम भी जश्न मनाएं, टीचरों ने मांगा ‘बर्थडे गिफ्ट’

