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हाथरस मामले पर यूपी ADG की सफाई- जबरन नहीं किया गया अंतिम संस्कार, परिजनों ने दी थी सहमति

बताया- अंतिम संस्कार के वक्त पीड़िता के परिवारवाले भी मौजूद थे

हाथरस मामले पर यूपी ADG की सफाई- जबरन नहीं किया गया अंतिम संस्कार, परिजनों ने दी थी सहमति

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हाथरस में गेंगरेप और हिंसा का शिकार हुई 19 वर्षीय युवती ने मंगलवार को दिल्ली स्थित एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। जिसके बाद पीड़िता के परिवारवालों के कभी ना भरने वाले जख्म पर मरहम लगाने की जगह यूपी पुलिस (UP Police) ने उनके जख्मों पर नमक छिड़क दिया। पुलिस ने अपनी मर्जी से हैवानियत की शिकार लड़की का रात रात 2:30 बजे अंतिम संस्कार कर दिया। जिसके बाद इस मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से बात की और कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। इस सब के बीच जबरन अंतिम संस्कार किए जाने आरोपों पर उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने सफाई पेश की है।


पोस्टमार्टम के बाद डेडबॉडी खराब हो रही थी

प्रशांत कुमार ने आरोपों से उलट इस बात का दावा किया है कि हाथरस गैंगरेप पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार पुलिस ने जबरन नहीं किया है। एक निजी समाचार चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि परिवारवालों की सहमति के बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया गया था। उन्होंने कहा कि देर होने से शव खराब भी हो रहा था। अंतिम संस्कार के वक्त पीड़िता के परिवारवाले भी मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि पीड़िता के अंतिम संस्कार को लेकर जिला प्रशासन ने ट्वीट किया था कि उसका अंतिम संस्कार परिवारवालों की मौजूदगी और उनकी सहमति से किया गया। बक़ौल प्रशांत कुमार, ‘पीड़िता की मृत्यु 29 सितंबर की सुबह हुई थी और पोस्टमार्टम के बाद डेडबॉडी खराब हो रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने परिवार की सहमति से पीड़िता का अंतिम संस्कार किया।’

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उन्होंने कहा कि अगर शव का अंतिम संस्कार करने में किसी तरह की जोर जबरदस्ती की गई है तो इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की टीम इस मामले में पीड़िता के परिजनों का बयान लेगी और जांच करेगी। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि हो सकता है कि रात को अंतिम संस्कार को लेकर परिवार की महिलाओं को कोई आपत्ति हो, लेकिन डेड बॉडी खराब हो रही थी। प्रशांत कुमार ने कहा कि समाज में कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में जबर्दस्ती नहीं की है, अगर डेडबॉडी रह जाती तो उसमें ऐसा क्या बदलाव हो जाता? एडीजी ने कहा कि जब वहां संयुक्त मजिस्ट्रेट ने अंतिम संस्कार की जानकारी दी है तो हमें सभी चीजें खारिज नहीं कर देनी चाहिए।

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