हिमाचल प्रदेश चुनाव परिणाम 2022

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कितनी है ईको-सेंसिटिव जोन की कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट,अब जान पाओगे

पारिस्थितिकीय रूप से संवदेनशील क्षेत्रों को जानने के लिए समिति गठित

कितनी है ईको-सेंसिटिव जोन की कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट,अब जान पाओगे

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शिमला। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार हिमाचल (Himachal) के पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्रों (ईको-सेंसिटिव जोन) की कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट ( Carrying Capacity Assessment) के आकलन के लिए राज्य स्तरीय संयुक्त समिति गठित की है। इसमें पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, वन, शहरी विकास, नगर एवं ग्राम योजना, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास, परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Forest, Urban Development, Town and Country Planning, Public Works, Rural Development, Transport, Pollution Control Board) आदि के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित विभागों के अलावा हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, एचएफआरआई शिमला, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर नई दिल्ली, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर, जीबी पंत संस्थान कुल्लू, वाडिया हिमालयन भूगर्भ संस्थान देहरादून और अन्य संस्थानों के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रबोध सक्सेना (Chief Secretary Environment Science and Technology Prabodh Saxena) ने आज यहां इस समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता की।

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उन्होंने प्रदेश के पारिस्थितिकीय रूप से संवदेनशील क्षेत्रों की वहन क्षमता के आकलन पर चर्चा की। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को प्रदेश के अधिसूचित पारिस्थितिक संवदेनशील क्षेत्रों की सूची और अन्य आवश्यक जानकारियां जल्द उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इन क्षेत्रों (environmentally sensitive areas) की वहन क्षमता के आकलन में पर्यावरण से संबंधित मुद्दों के अलावा आर्थिक, सामाजिक, ईको टूरिज्म,जनजातीय, वन्य जीवन, आपदा प्रबंधन और अन्य पहलुओं को भी शामिल कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि प्रथम चरण में पायलट आधार पर प्रदेश के 4.5 क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर नई दिल्ली, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर, जीबी पंत संस्थान कुल्लू, वाडिया हिमालयन भूगर्भ संस्थान देहरादून और अन्य संस्थानों की मदद ली जाएगी। इस संबंध में त्वरित कदम उठाने के लिए बैठक में एक उप समिति के गठन का निर्णय भी लिया गया।

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