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Breaking: #कोरोना संक्रमित का शव दोपहर तक ढूंढता रहा कंधे, कुछ ऐसी तस्वीर मिली है Shimla से
लेखराज धरटा/ शिमला। जरा गौर से देखिए इस तस्वीर को….यह तस्वीर बयां करती है हिमाचल के कोविड अस्पताल के ताजा-तरीन हालात को। शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (आईजीएमसी) के कोविड-19 वार्ड (Covid_19 ward) के बाहर एक शव पड़ा है। यह शव कोरोना संक्रमित (Corona infected dead body) का है। दोपहर तक यह शव यूं ही पड़ा रहा और किसी ने इसे उठाने की जहमत नहीं उठाई। ये वहीं आईजीएमसी (IGMC) का कोरोना वार्ड है जहां पर कुछ दिनों पहले हिमाचल (Himachal) के स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजीव सहजल (Health Minister Dr. Rajeev Sehjal) पीपीई किट पहनकर संक्रमितों का हाल पूछा था और संक्रमितों पास घंटों बतियाते रहे थे। लाव लश्कर के साथ वार्ड में पहुंचे डॉ राजीव सहजल को संक्रमितों ने अपनी व्यथा भी सुनाई थी और कोविड वार्डों का हाल भी बयां किया था।
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अगर आपने उस दिन के डॉ सहजल के विजिट के वीडियो व तस्वीरें देखी हों तो आज इस तस्वीर की हकीकत आप खुद समझ जाएंगे। चकाचक वार्ड, साफ सुथरे वार्ड बिस्तर, नर्सों- डाक्टरों की चहलकदमी और सामने खाने की प्लेट ….आज की तस्वीर से एकदम अलग। अस्पताल (Hospital) का दौरा करने के बाद डॉ सहजल ने कोरोना संक्रमण (Corona infection) से ठीक हुए लोगों को वार्डों का दौरा करने की भी सलाह दी थी। साथ ही वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों को कोविड वार्डों का दौरा करने को भी कहा था। जरा सोचिए अगर वास्तव में कोई वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी इन वार्डों का दौरा करते तो क्या हालत ऐसी होती। ऐसा नहीं है कि कोविड वार्डों की हालत की बयां करती तस्वीरें पहली बार लोगों को दिखी है। कोरोना के मरीज (Corona patients) जो कोविड सेंटरों में दाखिल हैं वो समय-समय पर इस मामलें में शिकायत (Complaint) करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हुए हैं और इसके बाद चिकित्सा अधिकारी सफाई भी देते रहे हैं पर एक चीज जो नहीं बदली वह है इन वार्डों का हालत। वो आज तक जस की तस है। शिमला के ही डीडीयू अस्पताल (DDU Hospital) में कोरोना संक्रमित महिला द्वारा फंदा लगने के मामले को भला कौन भूल सकता है। आईजीएमसी के ताजा प्रकरण पर अस्पताल के एमएस डॉ. जनकराज ने कहा कि ये किसी ने शरारत पूर्ण फोटो डाली है। शव वार्ड में नहीं था, बाहर रखा गया था। अस्पताल में कोरोना से करीब दस लोगों की जान चली गई है। ऐसे में शव को पूरी तरह से पैक करने में समय लगता है। अस्पताल में हाईकोर्ट (High Court) के आदेशों का पूरी तरह से पालन हो रहा है।


