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हिमाचल: मुआवजे के बदले मिला आश्वासन, एक साल से टेंट में रहने को मजबूर परिवार

भूस्खलन और सड़क निर्माण के कारण घर, जमीन, बगीचे हुए क्षतिग्रस्त

हिमाचल: मुआवजे के बदले मिला आश्वासन, एक साल से टेंट में रहने को मजबूर परिवार

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कुल्लू। प्रदेश के कुल्लू जिला में एक परिवार पिछले एक साल से शैड में रहने को मजबूर है। पीड़ित धनश्याम ने कहा कि लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की लापरवाही के कारण उनको और उनके परिवार को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के कारण उनकी जमीन में भूस्खलन हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल्द सुरक्षित स्थान देने की मांग की है।

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जानकारी के अनुसार, जिला कुल्लू के बंजार उपमंडल के गांव ननोट में घनश्याम सिंह ने अपने बगीचे व घर के नुक्सान के डर के चलते गुलाहधार से रम्बी सड़क निर्माण को लेकर स्टे लिया था, लेकिन ग्रामीणों के बार-बार दबाव डालने के कारण उन्होंने स्टे वापिस ले लिया। वहीं, लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण के कारण होने वाले नुक्सान को लेकर लिखित शर्त में नुक्सान की भरपाई व उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन जब सड़क की कटिंग का कार्य किया गया तो उसका मलबा घनश्याम की जमीन में फेंका गया। जिस कारण उसकी जमीन, बगीचे और घर को काफी नुकसान हुआ। वहीं, घनश्याम ने बताया कि वह पिछले एक साल से घर होते हुए भी टेंट में रह रहे हैं। भूस्खलन होने के कारण उनके घर पर हर वक्त खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि अब सर्दी आने वाली है तो ऐसे में वह अपने परिवार के साथ टेंट में कैसे रह सकते हैं।

घनश्याम सिंह ने बताया कि वह कई बार प्रशासन व लोक निर्माण विभाग के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी लिखित शर्त के बावजूद समस्या का समाधान करने के लिए सुध नहीं ले रहे हैं। घनश्याम ने कहा कि मई महीने से सुरक्षित जगह पर लोक निर्माण विभाग ढंगा दे रहा है, लेकिन जहां पर 60 से 70 मीटर भूस्खलन होने से उनके घर व जमीनों का नुक्सान हुआ है वहां पर पिछले एक साल से ढंगा नहीं लगाया गया है। उन्होंने बताया कि उनके घर के ढाई मीटर ऊपर पहाड़ी से जर्जर हालत में दीवार गिरने वाली है, जिससे उनका घर कभी भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो सकता है। घनश्याम ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें सुरक्षित स्थान दिया जाए।

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