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गुप्त नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ है फलदायक

गुप्त नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ है फलदायक

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गुप्त नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ को अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण माना गया है। इस दुर्गा सप्‍तशती को ही शतचंडी, नवचंडी अथवा चंडीपाठ भी कहते हैं और रामायण के दौरान लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान राम ने यही पाठ किया था।
हिंदू धर्म की मान्‍यतानुसार दुर्गा सप्‍तशती में कुल 700 श्लोक हैं जिनकी रचना स्‍वयं ब्रह्मा, विश्‍वामित्र और वशिष्‍ठ द्वारा की गई है और मां दुर्गा के संदर्भ में रचे गए इन 700 श्‍लोकों की वजह से ही इस ग्रंथ का नाम दुर्गा सप्‍तशती है।

  • दुर्गा सप्‍तशती मूलत: एक जाग्रत तंत्र विज्ञान है। यानी दुर्गा सप्‍तशती के श्‍लोकों का अच्‍छा या बुरा असर निश्चित रूप से होता है और बहुत ही तीव्र गति से होता है।
  • दुर्गा सप्‍तशती में अलग-अलग जरूरतों के अनुसार अलग-अलग श्‍लोकों को रचा गया है, जिसके अन्‍तर्गत मारण-क्रिया के लिए 90, मोहन यानी सम्‍मोहन-क्रिया के लिए 90, उच्‍चाटन-क्रिया के लिए 200, स्‍तंभन-क्रिया के लिए 200 व विद्वेषण-क्रिया के लिए 60-60 मंत्र है।

  • चूंकि दुर्गा सप्‍तशती के सभी मंत्र बहुत ही प्रभावशाली हैं, इसलिए इस ग्रंथ के मंत्रों का दुरूपयोग न हो, इस हेतु भगवान शंकर ने इस ग्रंथ को शापित कर रखा है, और जब तक इस ग्रंथ को शापोद्धार विधि का प्रयोग करते हुए शाप मुक्‍त नहीं किया जाता, तब तक इस ग्रंथ में लिखे किसी भी मंत्र तो सिद्ध यानी जाग्रत नहीं किया जा सकता और जब तक मंत्र जाग्रत न हो, तब तक उसे मारण, सम्‍मोहन, उच्‍चाटन आदि क्रिया के लिए उपयोग में नहीं लिया जा सकता।
  • हालांकि इस ग्रंथ का नवरात्र के दौरान सामान्‍य तरीके से पाठ करने पर जो भी फल होता है, वो जरूर प्राप्‍त होता है, लेकिन तांत्रिक क्रियाओं के लिए यदि इस ग्रंथ का उपयोग किया जा रहा हो, तो उस स्थिति में पूरी विधि का पालन करते हुए ग्रंथ को शापमुक्‍त करना जरूरी है।
  • इस संदर्भ में एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती को किसी कारणवश बहुत क्रोध आ गया, जिसके कारण माँ पार्वती ने रौद्र रूप धारण कर लिया। मां पार्वती के इसी क्रोधित रूप को हम मां काली के नाम से जानते हैं।

  • कथा के अनुसार मां काली के रूप में क्रोधातुर मां पार्वती पृथ्‍वी पर विचरन करने लगी और सामने आने वाले हर प्राणी को मारने लगी। इससे सुर-असुर, देवी-देवता सभी भयभीत हो गए और मां काली के भय से मुक्‍त होने के लिए ब्रह्मा जी के नेतृत्‍व में सभी भगवान शिव के पास गए और उनसे कहा कि- हे भगवन भोले, आप ही देवी काली को शांत कर सकते हैं और यदि आपने ऐसा नहीं किया, तो सम्‍पूर्ण पृथ्‍वी का नाश हो जाएगा, जिससे इस भूलोक में न कोई मानव होगा न ही जीव जन्‍तु।
  • भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को जवाब दिया कि- अगर मैंने ऐसा किया तो बहुत ही भयानक असर होगा। सारी पृथ्‍वी पर दुर्गा के रूप मंत्रों से भयानक शक्ति का उदय होगा और दावन इसका दुरूपयोग करना शुरू कर देंगे, जिससे सम्‍पूर्ण संसार में आसुरी शक्तियो का वास हो जाएगा।

  • ब्रह्मा जी ने फिर भगवान शिव से प्रार्थना की कि- हे भगवानआप रौद्र रूप में देवी को शांत कीजिए और इस दौरान उदय होने वाले मां दुर्गा के रूप मंत्रों को शापित कर दीजिए, ताकि भविष्‍य में कोई भी इसका दुरूपयोग न कर सके।
  • वहीं पर ऋषि नारद भी थे जिन्‍होने ब्रह्मा जी से पूछा कि- हे पितामह… अगर भगवान शिव ने उदय होने वाले मां दुर्गा के रूप मंत्रों को शापित कर दिया, तो संसार में जिसको सचमुच में देवी रूपों की आवश्‍यकता होगी, वे लोग भी मां दुर्गा के तत्‍काल जाग्रत मंत्र रूपों से वंचित रह जाएंगे। उनके लिए क्‍या उपाय है, ताकि वे इन जाग्रत मंत्रों का फायदा ले सकें?
  • भगवान नारद के इस सवाल के जवाब में भगवान शिव ने दुर्गा सप्‍तशती को शापमुक्‍त करने की पूरी विधि बताई। इस विधि का अनुसरण किए बिना दुर्गा सप्‍तशती के मारण, वशीकरण, उच्‍चाटन जैसेमंत्रों को सिद्ध नहीं किया जा सकता न ही दुर्गा सप्‍तशती के पाठ का ही पूरा फल मिलता है।

पंडित दयानंद शास्त्री, उज्जैन (म.प्र.) (ज्योतिष-वास्तु सलाहगाड़ी) 09669290067, 09039390067

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