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इसलिए होता है कुछ लोगों की आंखों का रंग नीला, जानोगे तो हो जाओगे एकदम हैरान

मशहूर अभिनेत्री ऐश्वर्या राय और सैफ-करीना के बेटे तैमूर की आंखों का रंग भी है नीला

इसलिए होता है कुछ लोगों की आंखों का रंग नीला, जानोगे तो हो जाओगे एकदम हैरान

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आपने देखा होगा कि कुछ लोगों की आंखें नीली होती हैं। उनकी आंखें देखकर आप भी सोचने के लिए मजबूर हो जाते होंगे कि आखिर इन लोगों की आंखें नीली क्यों होती हैं। इसकी क्या वजह है। अधिकतर लोगों की आंखों का रंग भूरा या गाढ़ा भूरा ही हुआ करता है। लेकिन कई लोगों की आंखों का हरा रंग, ग्रे और नीला भी होता है। महशूर अभिनेत्री एश्वर्य राय (Actress Aishwarya) की आंखें भी नीली हैं और सैफ-करीना (Saif-Kareena) के बेटे तैमूर की आंखें भी नीली ही हैं। यह रंग इंसान के जीन्स से जुड़ा होता है। कई इन लोगों को रंझ होता है कि उनकी आंखों का रंग ऐसा क्यों है, मगर यह शिकायत दूर नहीं की जा सकती।

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ऐसा माना जाता है कि दुनिया में दो फीसदी लोगोें की आंखें हरी होती हैं। वरना ज्यादातर लोगों की आंखें भूरी या गाढ़ी भूरी ही हुआ करती हैं। आपको आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आंखों का रंग पुतली में मैलानिन की मात्रा के हिसाब से ही तय होता है। इसके साथ-साथ प्रोटीन का घनत्व (Protein Density) और आसपास का उजाला भी असर डालता है। आंखों का रंग नौ श्रेणियों में बंटा होता है। इनमें 16 जीन्स होते हैं। ये जीन्स आंखों के रंग के साथ जुड़े हुए होते हैं। इनमें से दो प्रमुख जीन्स ही आंखों का रंग तय करते हैं। ये दोनों जीन्स ही क्रोमोसाम 15 में होते हैं। एक जीन्स एक्सप्रेशन को नियंत्रित करता है और दूसरा नीली आंखों का रंग तय करता है। यह जीन्स एक हद तक नीली या हरी आंखों से जुड़ा हुआ होता है।

दुनिया में नीले रंग की आंखों वाले लोग कम होते हैं। भूरी आंखों वाले लोग (brown eyed people) तो आसानी से मिल जाते हैं मगर नीली आंखों वाले लोग बड़ी ही मुश्किल से मिलते हैं।नीली आंखों वाले लोगों के पूर्वज एक ही हैं और यह माना जाता है कि करीब 6 हजार से 10 हजार साल पहले एक बदलाव इंसानी जीन में हुआ थाए जिसके चलते लोगों की आंखों का रंग नीला होने लगा। वहीं ऐसा माना जाता है कि आंखों का रंग बदल भी जाता है। ग्रे आंखों वाले लोग भी पाए जाते हैं। ग्रे रंग नीली आंखों वाले रंग से ज्यादा गाढ़ा होता है।

इसमें कम मैलानित पिगमेंट होता है। इसके साथ इनका घनत्व भी कम ही होता है। इनमें प्रोटीन भी कम ही होता है। विश्व में सिर्फ दो फीसदी लोगों की आंखें हरी होती हैं। यह कम मात्रा में मेलानिन (melanin) होने की वजह से होता है। हेजल आंखों वाले लोगों की आंखों का रंग नीले और भूरे रंग के बीच में होता है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पुतली के बाहरी हिस्से में मेलेनिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार जिंदगी के शुरुआती दौर में आंखों का रंग बहुत तेजी से बदल सकते है ऐसा कई बार होता है कि बच्चा नीली आंखों के साथ पैदा हो और बाद में उसकी आंखों का रंग बदलकर भूरा हो जाता है।

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