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बजट के लाल ब्रीफकेस के पीछे बड़ी ही रोचक है कहानी, निर्मला सीतारमण ने किया यह बदलाव

बजट की प्रिटिंग से पहले वित्त मंत्री खुद बनाते हैं कड़ाही हलवा

बजट के लाल ब्रीफकेस के पीछे बड़ी ही रोचक है कहानी, निर्मला सीतारमण ने किया यह बदलाव

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नई दिल्ली। हर साल केंद्र सरकार बजट (Budget) पेश करती है। ये परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। आपने संसद में बजट पेश होते टीवी (TV) पर जरूर देखा होगा। इस साल 2022 का केंद्रीय बजट केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Union Finance Minister Nirmala Sitharaman ) पहली फरवरी को पेश करेंगी। आपको बताते चलें कि इस साल का बजट सत्र 29 जनवरी से शुरू होगा और आठ अप्रैल को समाप्त होगा। बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री एक कड़ाही में हलवा बनाते हैं और इसे वित्त मंत्रालय के सभी कर्मचारियों को खिलाते हैं। यह हलवा क्यों बनता है, इस सवाल का जवाब बताते हैं आपको। इसके अलावा बजट से संबंधित अन्य जानकारियों भी आपको देंगे।

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हलवा रस्म

ये रस्म बजट की प्रिंटिंग (Printing) को लेकर की जाती है। इसके लिए वित्त मंत्री एक कड़ाही में हलवा बनाते हैं और इसे वित्त मंत्रालय के सभी कर्मचारियों को खिलाते हैं। इसके बाद बजट की प्रिंटिंग प्रक्रिया शुरू की जाती हैं

लाल ब्रीफकेस

पहले भारत में वित्तमंत्री बजट पेश करने के लिए लाल ब्रीफकेस (Red Briefcase) लेकर आया करते थे, लेकिन 2019 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडियन लुक (Indian Look) देते हुए इसे कपड़े का बनवाया और इसे लेकर सदन में पहुंची। इसे खाता बही (Ledger) का नाम दिया गया। इसकी परंपरा भी ब्रिटेन से अपनाई गई है, जहां इसे बजट चीफ विलियम ग्लैडस्टोन (Chief William Gladstone) ने शुरू किया था। वे अपने लंबे बजट भाषण के लिए जाने जाते थे और इसलिए उन्हें सारे कागज रखने के लिए ब्रीफकेस की जरूरत पड़ती थी।

ब्लू शीट

केंद्रीय बजट की शुरुआत पेपर की ब्लू शीट (Blue Sheet) होती है, जिस पर नंबर लिखे होते हैं। इसे बजट का ब्लू प्रिंट कहा जाता है। ये ब्लू शीट टॉप सीक्रेट होती है और इसकी पूरी जिम्मेदारी बजट के संयुक्त सचिव की होती है।

ब्लैक बजट

1973-74 में उच्च घाटे के कारण बजट को ब्लैक बजट नाम दिया गया था। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव बी चव्हाण (Finance Minister Yashwantrao B Chavan) ने पेश किया था। उस समय कुल घाटा 550 करोड़ रुपए था।

द ड्रीम बजट

1997 में व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट कर को कम करने के लिए कई बदलाव किए गए और बजट को द ड्रीम बजटका नाम दिया गया। लोगों ने बजट का स्वागत किया।

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