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यह पहला विकेट है, लड़ाई अभी बाकी है-बोले विक्रमादित्य, केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए
Vikramaditya Singh: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज़ हो गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश के युवाओं के संगठित और एकजुट संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने दलगत राजनीति, जाति और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर जिस तरह न्याय की मांग की, यह इस्तीफा उसी का नतीजा है।
इस्तीफा स्वागत योग्य, लेकिन फैसला बहुत देर से आया
मीडिया से बातचीत करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना स्वागत योग्य है, लेकिन इसमें काफी देर कर दी गई। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- जिस दिन NEET का पेपर लीक हुआ था, जिस दिन न्याय मांग रहे मासूम छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया था और जिस दिन हताशा में आकर छात्रों ने आत्मघाती कदम उठाए थे, उसी दिन शिक्षा मंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए था या पीएम को उन्हें पद से बर्खास्त कर देना चाहिए था
संघर्ष को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाएं
इस्तीफे की इस पूरी प्रक्रिया का पूरा श्रेय देश के जुझारू युवाओं को देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने सचेत किया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस लड़ाई का महज “पहला कदम” और “पहला विकेट” है, पूरी लड़ाई अभी बाकी है।उन्होंने देश की युवाशक्ति से आह्वान किया कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बन जाती, तब तक इस संघर्ष को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाना होगा।
शिक्षा व्यवस्था और केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर खड़े किए सवाल
शैक्षणिक संस्थानों के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों और बड़े शैक्षणिक संस्थानों में केवल एक विशेष विचारधारा के लोगों को उच्च पदों पर बैठाया जा रहा है।योग्यता और निष्पक्षता को दरकिनार कर की जा रही इन नियुक्तियों के कारण आज देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है और छात्रों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।
संजू चौधरी

