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1958 में शुरू हुआ था गिफ्ट टैक्स, क्या आज भी लिया जाता है, जानिए यहां

पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू ने की थी शुरुआत, इन देशों को दिया था उदाहरण

1958 में शुरू हुआ था गिफ्ट टैक्स, क्या आज भी लिया जाता है, जानिए यहां

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नई दिल्ली। पहली फरवरी से 2022-23 का केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश किया जाएगा। इस बजट में आपको क्या-क्या मिलेगा यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन जब से देश में बजट पेश हो रहा है, उस दौर की एक बात हम आपको बताने जा रहे हैं। अभी तो आप इनकम टैक्स (Income Tex) या कोई और टैक्स दे रहे होंगे, पर उस दौर में देश की जनता गिफ्ट टैक्स (Gift Tax) भी देती थी। बीच में इसे बंद कर दिया गया था, लेकिन इसे फिर से शुरू कर दिया है।

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पूर्व पीएम नेहरू ने पेश किया था बजट

साल 1958 में बजट पेश किए जाने से ठीक पहले देश के तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी (Finance Minister TT Krishnamachari ) को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। भ्रष्टाचार के एक मामले में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद उन्हें फरवरी, 1958 में अपना पद छोड़ना पड़ा था। ऐसे में देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू (PM Pandit Jawaharlal Nehru) ने वित्त वर्ष 1958.59 का आम बजट पेश किया था। बजट भाषण की शुरुआत करते हुए नेहरू ने कहा था कि परंपरा के हिसाब से आगामी वर्ष का बजट आज पेश होना है। अप्रत्याशित और दुखी कर देने वाले घटनाक्रम की वजह से वित्त मंत्री आज यहां नहीं हैं जो सामान्य परिस्थितियों में यह बजट भाषण पढ़ रहे होते। एकदम आखिरी समय में यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मुझे मिली है।

गिफ्ट टैक्स का प्रस्ताव

नेहरू ने 1958 में बजट पेश करते हुए 1957 में कृष्णामाचारी द्वारा लगाए गए टैक्स (Tax) में कोई खास बदलाव नहीं किया। हालांकि, कर चोरी को रोकने के लिए गिफ्ट टैक्स नाम से नए टैक्स की घोषणा की। टैक्स प्रस्ताव की घोषणा करते हुए नेहरू ने कहा था कि अपने निकट रिश्तेदारों या सहयोगियों को गिफ्ट के जरिए प्रॉपर्टी ट्रांसफर करना ना सिर्फ एस्टेट ड्यूटी बल्कि इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स (Wealth Tax) और एक्सपेंडिचर टैक्स से बचने का सबसे आम तरीका बन चुका है। इसे रोकने का सबसे प्रभावी तरीका गिफ्ट पर टैक्स लगाना है। इस तरह का टैक्स अमरीका, कनाडा, जापान (Japan) और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से लागू है।

इन तथ्यों को जानना भी है जरूरी

गिफ्ट टैक्स के प्रावधानों में पत्नी को दिए गए एक लाख रुपए तक के गिफ्ट पर टैक्स लागू नहीं था। हालांकि, अक्टूबर 1998 में गिफ्ट टैक्स को खत्म कर दिया गया था और सभी तरह के गिफ्ट पूरी तरह से टैक्स फ्री हो गए थे। हालांकि, 2004 में इस टैक्स को दोबारा लागू किया गया था।

1957 के बजट में कृष्णामाचारी ने लगाए थे दो टैक्स

कृष्णामाचारी ने 1957 में बजट पेश करते हुए वेल्थ टैक्स और एक्सपेंडिचर टैक्स लगाए थे। अपने इस फैसले को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा था कि यह महसूस किया गया है कि मौजूदा इनकम टैक्स से जुड़े कानूनों में परिभाषित इनकम वास्तव में टैक्स भुगतान की क्षमता का अंदाजा लगाने के लिए काफी नहीं है। उन्होंने वेल्थ टैक्स को इनकम टैक्स का पूरक बताया था।

50 हजार रुपए तक के गिफ्ट पर छूट

2017 में गिफ्ट से संबंधित इनकम टैक्स प्रावधानों में संशोधन के बाद यह तय किया गया है कि महंगे गिफ्ट पर टैक्स की देनदारी बनेगी। गिफ्ट में आपको कैश मिला हो या चेक, ड्राफ्ट, चल-अचल संपत्तिए, आपको इन्हें आईटीआर में इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज में दिखाना पड़ता है। हालांकि अगर गिफ्ट की वैल्यू 50 हजार रुपए तक हैए तो इसे टैक्स से छूट मिल जाएगी। इनके अलावा विवाह या सालगिरह जैसे मौकों पर मिलने वाले सारे गिफ्ट टैक्स फ्री होते हैं।

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