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शिमला युग हत्याकांड मामले में फांसी की सजा पर क्या आया बड़ा फैसला, जानें यहां

चार साल से अंतिम फैसले पर नहीं लग पा रही मुहर

शिमला युग हत्याकांड मामले में फांसी की सजा पर क्या आया बड़ा फैसला, जानें यहां

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शिमला। राजधानी के चर्चित युग हत्याकांड मामले (Yug murder case ) में दोषियों को फांसी की सजा की सुनाई फिलहाल टल गई है। छह हफ्ते के बाद हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court) सुनवाई करेगा। शिमला की स्थानीय अदालत ने 2018 में तीन दोषियों को सजा-ए-मौत (Death sentence) सुनाई थी। इस मामले में सजा की कन्फर्मेशन के लिए हाईकोर्ट ने अंतिम फैसला लेना था। डबल बेंच में किसी कारण से सुनवाई  आज नहीं हो सकी। अब अंतिम सुनवाई 6 हफ्ते बाद होगी। युग हत्याकांड के तीन दोषी विक्रांत बक्शी, तेजेंद्र पाल व चंद्र शर्मा को स्थानीय फांसी की सजा (Sentence To Death) दी थी। अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला बताते हुए तीनों को फांसी की सजा सुनाई थी।

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अब तक ऐसे चला केस

25 सितंबर 2018 को हाईकोर्ट में दोषियों की फांसी की सजा के पुष्टिकरण के लिए सुनवाई थी। तब सरकारी पक्ष के पास रिकॉर्ड (Record) न होने के कारण सुनवाई 9 अक्तूबर 2018 तक टाल दी गई थी। फिर 10 अक्तूबर, 2018 को हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल व न्यायमूर्ति सीबी बारोवालिया ने खुद को सुनवाई से अलग किया था। इसके बाद में सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के विवेक के अनुसार किसी अन्य खंडपीठ के समक्ष सौंपने के आदेश (Order) दिए थे।
 उसके बाद तीन नवंबर 2018 को इस मामले की सुनवाई फिर से 18 दिसंबर तक टाल दी गई थी। तब न्यायमूर्ति धर्मचंद चौधरी व न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई तय हुई थी। 27 सितंबर,  2019 को हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने सजा के पुष्टिकरण मामले में नए रोस्टर के मुताबिक दूसरी खंडपीठ में तय की। हालांकि न्यायमूर्ति धर्मचंद चौधरी की बैंच ने मासूम बच्चे के कंकाल को उसके पिता को सौंपने के आदेश जरूर जारी किए थे।

फिरौती के लिए मार डाला था मासूम

इसके बाद लंबे समय तक मामले में सुनवाई नहीं हुई और पहली अप्रैल, 2022 को मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने सुनवाई की तारीख 18 अप्रैल तय की थी। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ में किन्हीं कारणों से सुनवाई नहीं हो सकी और इस मामले में 6 हफ्ते बाद सुनवाई तय की गई।
 उल्लेखनीय है कि 14 जून 2014 को शिमला (Shimla) के राम बाजार से एक कारोबारी के चार साल के बच्चे का फिरौती के लिए अपहरण किया गया था। अपहरण करने वाले तीनों युवक राम बाजार (Ram Bazar) के ही रहने वाले थे। बाद में उन्होंने यातनाएं देकर युग की हत्या कर दी। मासूम का कंकाल अगस्त, 2016 में भराड़ी के पेयजल टैंक से मिला था। शिमला की स्थानीय अदालत ने 2018 में 5 सितंबर को तीनों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा दी थी।

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