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हिमाचल: तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर, 155 ग्लेशियर पिघल कर झील में तब्दील

प्रोफेसर डॉ. चंद्र प्रकाश ने ग्लेशियर के झीलों पर किए शोध में हुआ खुलासा

हिमाचल: तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर, 155 ग्लेशियर पिघल कर झील में तब्दील

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हमीरपुर। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हिमालय में ग्लेशियर से बनी झीलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले चार दशक में उच्च हिमालय और पीर पंजाल की रेंज में ग्लेशियर के झीलों की संख्या में लगभग दोगुना इजाफा हुआ है। इस बात का खुलासा हिमाचल प्रदेश में हमीरपुर जिले में मौजूद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सिविल विभाग के प्रोफेसर डॉ. चंद्र प्रकाश के शोध में हुआ हैं।

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पिछले चार दशक में उच्च हिमालय और पीर पंजाल की रेंज में ग्लेशियर से बन रही झीलों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है। झीलों की संख्या बढ़ने से नेपाल, भूटान, तिब्बत और भारत के सिक्किम, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर व हिमाचल के क्षेत्रों में खतरा पैदा हो गया है। इस बात का खुलासा एनआईटी हमीरपुर के प्रो. डॉ. चंद्र प्रकाश के शोध में हुआ है। शोध के मुताबिक साल 1971 में सिर्फ 77 ग्लेशियर झीलें थी। 2011 में उन झीलों की संख्या बढ़कर 155 पहुंच गई है। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रो. चंद्र प्रकाश ग्लेशियर से बनने वाली झील के विषय पर कई सालों से शोध कर रहे हैं। उनका शोध उच्च हिमालय और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की अभी 4 नदी घाटियों पर अधिक केंद्रित है। ग्लेशियर झीलों का यह अध्ययन इंडियन रिमोट सेंसिंग सैटलाइट डाटा और अमेरिका द्वारा साल 1971 में की गई कोरोना एरियल फोटोग्राफ की मदद से किया गया है।

चंद्र और भागा बेसिन को ब्यास और पार्वती बेसिन से अलग करने वाली पीर पंजाल रेंज भी इस अध्ययन का केंद्र बिंदु रहा है, हालांकि उच्च हिमालय रेंज में पीर पंजाल रेंज के बजाया अधिक ग्लेशियर झील का निर्माण पिछले चार दशक में देखने को मिला है। चंद्रा बेसिन में ही पिछले चार दशक में 3 गुना इजाफा इन झील में देखने को मिला है। साल 1971 में कुल 14 झील इस बेसिन में मौजूद थी जो कि अब बढ़कर 48 हो गई है। इस बेसिन में उच्च हिमालय क्षेत्र की सबसे बड़ी दो ग्लेशियर झील मौजूद हैं। इस अध्ययन में भी एनआईटी हमीरपुर के प्रो. चंद्र प्रकाश अपने शोधार्थियों के साथ जुटे हुए हैं। एक अनुमान है कि इन झील में पिछले एक दशक में उम्मीदों से कहीं ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

इस संदर्भ में डॉ चंद्र प्रकाश ने बताया कि 2013 में हुई केदारनाथ त्रासदी के बाद हिमाचल प्रदेश में भी ग्लेशियर पिघलने से त्रासदी की संभावना ज्यादा है। इसको लेकर एनआईटी ने ग्लेशियर स्टडी शोध शुरू किए हैं, जिसमें 1971 से 2011 तक उच्च हिमालय और पीर पंजाल रेंज में विकसित हुई, नई झीलों के आकार व संख्या पर रिपोर्ट तैयार की गई। उन्होंने बताया कि शोध में पाया गया कि 1971 से 2011 तक नई झीलों की संख्या बढकर 154 हो गई है तथा इनमें बडे आकार की झीलों को ही शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते निकट भविष्य में हिमाचल पर भी खतरा मंडरा रहा है और 16 बडी झीलें इसका प्रमुख बिंदु रहेंगी।

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