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हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज किया आईएएस अधिकारी को जारी किया कारण बताओ नोटिस

सिविल जज नाहन ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज किया आईएएस अधिकारी को जारी किया कारण बताओ नोटिस

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शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court) ने सिविल जज नाहन द्वारा आईएएस अधिकारी (IAS officer) को कारण बताओ नोटिस जारी करने वाले आदेशों को जज की गंभीर गलती मानते हुए खारिज कर दिया। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने उक्त आदेश को खारिज करते हुए कहा कि सिविल जज के 2 अप्रैल 22 वाले आदेशों को किसी भी तरह से कानून के अनुसार पारित आदेश नहीं कहा जा सकता। गौरतलब है कि एक दीवानी मुकदमे में नाहन में तैनात अतिरिक्त जिलाधीश सिरमौर सोनाक्षी सिंह तोमर ने जिलाधीश की ओर से जवाब के साथ हलफनामा दायर किया था। सिविल जज ने जवाब के साथ लगे हलफनामे का अवलोकन करने पर पाया कि आईएएस सोनाक्षी सिंह तोमर जिलाधीश के तौर पर हलफनामे पर हस्ताक्षर नहीं कर सकती। जज का कहना था कि जिलाधीश सिरमौर राम कुमार गौतम है इसलिए सोनाक्षी सिंह तोमर ने खुद को जिलाधीश बताते हुए झूठा हलफनामा दायर किया।

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जज के पूछने पर एडीए ने बताया कि सोनाक्षी सिंह तोमर सिरमौर की अतिरिक्त जिलाधिकारी है और 14/27.10.1983 को जारी अधिसूचना के अनुसार भी जिलाधिकारी की ओर से शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने की शक्तियां रखती है। सिविल जज ने इस स्पष्टीकरण को न मानते हुए कहा कि सोनक्षी सिंह ने झूठा शपथपत्र दायर कर प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 177, 197, 419, 468 और 471 के तहत आपराध किया है। सिविल जज ने इन तथ्यों के आधार पर 2 अप्रैल 2022 को आदेश जारी कर आईएएस अधिकारी एडीसी सिरमौर को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर यह स्पष्टीकरण देने को कहा कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की जाए। इन आदेशों को सरकार ने समीक्षा याचिका दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 25.01. 1971 और  14/27.10.1983 की सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं का अवलोकन करने पर पाया कि एडीसी जिलाधिकारी की ओर से शपथपत्र दायर करने के लिए अधिकृत है इसलिए सिविल जज ने कारण बताओ नोटिस जारी करते समय गम्भीर गलती की। हाईकोर्ट ने उक्त आदेश को कानून की नजर में टिकने योग्य न पाते हुए खारिज कर दिया।

हिमाचल होईकोर्ट ने शिमला में वैली ब्रिज के नीचे हुए भूस्खलन पर सरकार से मांगी रिपोर्ट

राजधानी शिमला को निचले हिमाचल से जोड़ने वाले घंडल में बनाये वैली ब्रिज के नीचे हुए भूस्खलन को लेकर हाईकोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश अमजद ए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है। उल्लेखनीय है कि नेशनल हाईवे-205 पर घणाहट्टी के पास घंडल में बने वैली ब्रिज के नीचे हुए भूस्खलन (Landslide) से सड़क मार्ग को खतरा पैदा हो गया है। एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। भारी बारिश से ब्रिज के एक तरफ के हिस्से के नीचे से मिट्टी खिसक गई है। इसे लेकर शिमला पुलिस ने सोशल मीडिया पर एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को सुरक्षित आवाजाही करने की हिदायत दी है। भूस्खलन की जगह पर तिरपाल लगाया है ताकि बारिश में पानी न रिसे। बता दें कि इस सड़क का कुछ हिस्सा गिरने के बाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। अदालत की ओर से समय-समय पर पारित आदेशों के तहत प्रशासन ने घंडल में वैली ब्रिज का निर्माण किया था। एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस सड़क को ठीक नहीं किया गया है।

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