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अब हिमाचल में भी औषधीय पौधों को प्रसाद के रूप में चढ़ा सकेंगे श्रद्धालु, देश के इस प्रसिद्ध मंदिर से हुई है शुरुआत

इस योजना से जहां पर पर्यावरण का संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

अब हिमाचल में भी औषधीय पौधों को प्रसाद के रूप में चढ़ा सकेंगे श्रद्धालु, देश के इस प्रसिद्ध मंदिर से हुई है शुरुआत

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बिलासपुर। भारत सरकार के सौजन्य से दक्षिण भारत के मशहूर मंदिर तिरुपति बालाजी की तर्ज पर अब हिमाचल के शक्तिपीठों पर भी अब श्रद्धालु मंदिरों में आध्यात्मिक और औषधीय पौधे प्रसाद के रूप में चढ़ा सकेंगे। वहीं, गोल्डन टेंपल में भी यह योजना शुरू हो चुकी है। इस योजना से जहां पर पर्यावरण का संरक्षण होगा। वहीं, पर कोरोना जैसी महामारी के विनाश के लिए औषधीय प्राकृतिक औषधीय दवाइयां स्थानीय लोगों को मिल पाएगी।पहले चरण में यह योजना हिमाचल देव भूमि हिमाचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी, श्री चिंतपूर्णी और बाबा बालक नाथ मे शुरू की जाएगी। जबकि, दूसरे चरण में श्री ब्रजेश्वरी देवी कांगड़ा, श्री चामुंडा देवी और श्री ज्वाला जी में यह योजना शुरू की जाएगी। तीसरे चरण में इसे माता वैष्णो देवी के दरबार में शुरू किया जाएगा। बता दें कि इस मुहिम की शुरुआत मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर ने की।

आज विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी में भी वृक्ष प्रसादम योजना बड़े जोर शोर से शुरू की गई है। माता श्री नैना देवी के चरणों में एक आध्यात्मिक वृक्ष भेंट करके इस मुहिम को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए आगाज किया है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंदिर न्यास के अध्यक्ष एसडीएम राजकुमार ठाकुर ने इस कार्यक्रम का विधिवत रूप से आज पूजा अर्चना करके शुरुआत की। अब माता श्री नैना देवी के दरबार में भी श्रद्धालुओं को औषधीय एवं आध्यात्मिक पौधे प्रसाद के रूप में चढ़ा पाएंगे और उन्हें वापस प्रसाद के रूप में भी औषधीय पौधे मिलेंगे।आज चंडीगढ़ से वृक्ष प्रसादम फाउंडेशन की एक टीम माता श्री नैना देवी के दरबार में पहुंची। जिसमें म्यूजियम एंड आर्ट चंडीगढ़ के डायरेक्टर डॉक्टर पीसी शर्मा और वृक्ष प्रसाद फाउंडेशन के अध्यक्ष राहुल महाजन मौजूद रहे। चंडीगढ़ से आए म्यूजियम एवं आर्ट के डायरेक्टर डॉक्टर पीसी शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि इससे पहले यह योजना साउथ के तिरुपति बालाजी मंदिर और पंजाब के गोल्डन टेंपल में बड़े जोर शोर से चलाई गई है। सिख श्रद्धालुओं का तो इतिहास ही इन वृक्षों से जुड़ा है आम साहिब ,प्लाह साहिब और कई तरह के वृक्षों के नाम पर उनके गुरुद्वारों के नाम है। इसलिए हमारी प्रकृति को बचाने के लिए पर्यावरण को बचाने के लिए आज वृक्षों की बहुत महत्ता है।

 

 

जिसके तहत यह योजना शुरू की गई है उन्होंने कहा कि पहले चरण में माता श्री नैना देवी सिद्ध, बाबा बालक नाथ और माता चिंतपूर्णी टेंपल इससे जुड़ जाएंगे और दूसरे चरण मंदिर श्री ज्वाला जी , श्री ब्रजेश्वरी देवी कांगड़ा और श्री चामुंडा देवी जबकि तीसरे चरण में माता वैष्णो देवी मंदिर इस योजना से जोड़ा जाएगा ताकि श्रद्धालु प्रसाद के रूप में औषधीय और आध्यात्मिक पौधे माता के चरणों में चढ़ा सकें और भविष्य में उन्हें प्रसाद के रूप में भी पौधे मिले इसके अलावा नैना देवी के आसपास की पहाड़ियां है जहां पर घास फूस लगी है वहां पर भी एक मुहिम के तहत औषधीय पौधे आध्यात्मिक पौधे लगाए जाएंगे ताकि यहां का वातावरण भी शुद्ध हो और लोगों को अपनी बीमारियों के इलाज के लिए हर तरह की जड़ी बूटियां इन पौधों से प्राप्त हो सके।

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