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HP Govt Big Decision: हिमाचल में प्रशासनिक खर्च घटाने की तैयारी, अफसरों को मिलेगी सिर्फ 1 गाड़ी
HP Govt Big Decision: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य में प्रशासनिक खर्चों पर लगाम कसने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। सरकार अब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जाने वाले सरकारी वाहनों की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्ताव के तहत, अब राज्य के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को—चाहे उनके पास कितने भी विभागों का अतिरिक्त प्रभार क्यों न हो—केवल एक ही सरकारी वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। जिन अधिकारियों के पास वर्तमान में एक से अधिक सरकारी गाड़ियां हैं, उनसे अतिरिक्त वाहन वापस लिए जाएंगे।
फिजूलखर्ची पर कड़ा प्रहार
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, सचिव और निदेशक स्तर के कई अधिकारियों के पास अलग-अलग विभागों का प्रभार होने के कारण हर विभाग के नाम पर अलग-अलग गाड़ियां आवंटित हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का मानना है कि इस व्यवस्था से ईंधन, गाड़ियों के रख-रखाव (मेंटेनेंस) और चालकों (ड्राइवर्स) के वेतन पर सरकार का अनावश्यक खर्च काफी बढ़ रहा है।सरकार का स्पष्ट मानना है कि एक अधिकारी अपने सभी विभागीय कार्यों के लिए केवल एक वाहन का उपयोग आसानी से कर सकता है। ऐसे में अतिरिक्त वाहनों का औचित्य समाप्त हो जाता है।
आवश्यकता वाले फील्ड कार्यालयों को आवंटित होंगे वाहन
सरकार की योजना के अनुसार, अधिकारियों से वापस लिए गए वाहनों को बेकार खड़ा रखने के बजाय उन विभागों और फील्ड कार्यालयों (Field Offices) में भेजा जाएगा, जहां गाड़ियों की वास्तविक और सख्त जरूरत है। इससे दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन में आसानी होगी।
प्रशासनिक दक्षता में होगी बढ़ोतरी
सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सभी विभागों से अधिकारियों के पास उपलब्ध गाड़ियों का पूरा ब्योरा मांगा जाएगा। इसके आधार पर अतिरिक्त वाहनों की पहचान कर उन्हें वापस लिया जाएगा।सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों की गति और दक्षता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, सीमित सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा और बेवजह के प्रशासनिक खर्चों पर स्थायी अंकुश लगेगा। इसे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण आर्थिक व नीतिगत सुधार माना जा रहा है।
अनु गुप्ता

