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हिमाचलः गोविंदसागर से बाहर आएंगे प्राचीन मंदिर, 1400 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार

नड्डा बोले, जल्द पूरी सुविधाएं देने लगेगा एम्स, बिलासपुर में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

हिमाचलः गोविंदसागर से बाहर आएंगे प्राचीन मंदिर, 1400 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार

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बिलासपुर। बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और सीएम जयराम ठाकुर ने आज बिलासपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) बिलासपुर के कोठीपुरा स्थित परिसर में विभिन्न परियोजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर जगत प्रकाश नड्डा (JP Nadda) ने कहा कि मरीज की जान बचाने के लिए अपनी जान लगा देना ही एम्स की संस्कृति है, इसलिए संस्थान की गुणवत्ता और संकाय की क्षमता के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के प्रयासों से ही बिलासपुर (Bilaspur) में 750 बिस्तर क्षमता का एम्स संस्थान आकार ले रहा है, जिस पर लगभग 1471 करोड़ रुपए व्यय किए जा रहे हैं। इसका अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके विभिन्न भवनों के निर्माण के साथ-साथ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों (Health Workers) की तैनाती पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि जनता को अतिशीघ्र स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण लाभ मिल सके।

 

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का कार्य प्रगति पर

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन नेशनल हाईवे (Kiratpur-Nerchowk Fourlane National Highway) का कार्य प्रगति पर है। लगभग 47 किलोमीटर 750 मीटर लंबे इस मार्ग पर 22 बडे़ पुलों, 15 छोटे पुलों और पांच डबललेन सुरंगों (Doublelane Tunnels)का निर्माण किया जा रहा है। फोरलेन का कार्य पूर्ण होने पर गरामोड़ा से मंडी की दूरी 40 किलोमीटर कम होगी तथा यात्रा का समय भी लगभग सवा घंटा कम हो जाएगा। बिलासपुर और गरामोड़ा की दूरी भी 23 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 6753 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाली भानुपल्ली रेलवे लाइन का कार्य भी प्रगति पर है, जिसके तहत हिमाचल (Himachal) में 48.6 किलोमीटर लाइन बिछाई जाएगी। इस ट्रैक पर 20 सुरंगें और 26 मुख्य पुल बनाए जाएंगे। इस परियोजना के तहत बैरी तक भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।

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प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों को पुनर्स्थापित करने को 1400 करोड़ की परियोजना तैयार

इस अवसर पर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि गोविंदसागर झील में समा चुके बिलासपुर के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों को पुनर्स्थापित करने के लिए 1400 करोड़ की परियोजना तैयार की गई है, जिसे तीन चरणों में कार्यान्वित करने का प्रस्ताव है। प्रदेश सरकार (State Government) ने बजट में इसकी भी घोषणा की है। इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से पूरा किया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि परियोजना के पहले चरण में इन मंदिरों को नाले का नौण में पुनर्स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसी परियोजना के दूसरे चरण में सांडू के मैदान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आसपास एक जलाशय बनाया जाएगा। इसमें रिवर फ्रंट (River Front) और वॉकवेज इत्यादि विकसित किए जाएंगे। जयराम ठाकुर ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से जहां बिलासपुर एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा, वहीं इससे बिलासपुर का पुराना इतिहास और संस्कृति भी पुनर्जीवित होगी, जिससे सभी बिलासपुरवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

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एम्स और हाइड्रो इंजीनियरिंग कालेज को 21 लाख पानी

सीएम ने कहा कि एम्स और हाइड्रो इंजीनियरिंग महाविद्यालय (Hydro Engineering College) को प्रतिदिन 21 लाख लीटर पेयजल उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से 66 करोड़ रुपए की कोलडैम उठाऊ पेयजल परियोजना स्वीकृत की गई है, जिसका 97 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। बिलासपुर में 50 बिस्तर क्षमता के मातृ शिशु स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के निर्माण पर 10 करोड़ रुपए की राशि व्यय की जा रही है और इसका 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर की मरम्मत पर लगभग अढ़ाई करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं, जिसका कार्य प्रगति पर है।

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इस अवसर पर एम्स परियोजना, भानुपल्ली रेल परियोजना, फोरलेन नेशनल हाई-वे और गोविंदसागर में जलमग्न मंदिरों की पुनर्स्थापना से संबंधित प्रस्तुति भी दी गई। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेंद्र गर्ग, सांसद एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, विधायक सुभाष ठाकुर, विधायक जेआर कटवाल, राज्य आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष रणधीर शर्मा, सीएम के राजनीतिक सलाहकार त्रिलोक जम्वाल, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, सीएम के प्रधान सचिव सुभासीष पन्डा, पर्यटन विभाग के निदेशक अमित कश्यप, उपायुक्त पंकज राय, पुलिस अधीक्षक एसआर राणा, एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. वीर सिंह नेगी, भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित, रेलवे विकास निगम लिमिटेड के अतिरिक्त महाप्रबंधक सुशील महाजन संयुक्त महाप्रबंधक अनमोल नागपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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