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हिमाचल विधानसभा: मनरेगा मजदूरी पर कुंडली मारे बैठे अधिकारियों, कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर ने विधानसभा में किया इसका ऐलान

हिमाचल विधानसभा: मनरेगा मजदूरी पर कुंडली मारे बैठे अधिकारियों, कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

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धर्मशाला। हिमाचल में मनरेगा (MGNREGA) मजदूरों को पांच माह तक वेतन ना मिलने के मामले में दोषी अफसरों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। ग्रामीण विकास व पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर (Virender Kanwar) मंगलवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Winter Session) के चौथे दिन विधायक जगत सिंह नेगी द्वारा पूछे सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने सदन को बताया कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। इतना ही नहीं मनरेगा में मैटिरियल कंपोनेंट का पैसा भी चुकता नहीं किया गया है। इस मामले को लेकर सदन में विपक्ष ने हंगामा किया और मनरेगा के मस्ट्रोल में भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए।

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वीरेंद्र कंवर ने कहा कि 2018-19 में मनरेगा के तहत 270 लाख कार्य दिवस की जगह 280 लाख कार्य दिवस अर्जित किए गए। इसी तरह 2020-21 में लक्ष्य से अधिक 336 लाख कार्य दिवस अर्जित हुए। वहींए इस साल 250 लाख की एवज में 233.94 लाख कार्य दिवस अर्जित कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने केंद्र से कोटा बढ़ाने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य से अधिक काम के चलते मजदूरों की दिहाड़ी और मटेरियल की राशि अदा नहीं हो पाई। केंद्र सरकार से यह पैसा अभी नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने 205 करोड़ रुपए दिया था जो जारी किया जा चुका है और हिमाचल सरकार ने भी 100 करोड़ रुपए कॉरपस फंड के रूप में दिए हैं। इसमें से 88 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं।

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आशा कुमारी बोलीं चंबा जिला में है लंबी पेंडेंसी

विधायक आशा कुमारी (MLA Asha Kumari) ने अनुपूरक सवाल में कहा कि चंबा (Chamba) जिला में भी लंबी पेंडेंसी है। इसे जल्द पूरा किया जाए। विधायक जगत सिंह नेगी ने 5 महीने से मजदूरों को दिहाड़ी न मिलने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। वहीं, विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री (Mukesh Agnihotri) का कहना था कि मनरेगा योजना को यह सरकार खत्म नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि पंचायतों में सभी प्रधान फर्जी मस्ट्रोल भर रहे हैं। क्योंकि मिस्त्री की दिहाड़ी 321 रुपए मिल रही है, जबकि मिस्त्री कहीं और काम करते हैं तो 900 रुपए तक दिहाड़ी लेते हैं। ऐसे में मस्ट्रोल में भ्रष्टाचार हो रहा है।

इस पर पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि वर्तमान सरकार ने मनरेगा में आधारभूत परिवर्तन किया है, कई नए काम इसमें जरूरत के हिसाब से जोड़े गए हैं। उन्होंने माना कि दिहाड़ी के 2 करोड़ 20 लाख तथा मेटीरियल कंपोनेंट के 3 करोड़ 83 लाख रुपए लंबित हैं। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से केंद्र सरकार इस राशि को अदा करेगी और यह देनदारी जल्द ही चुकता कर दी जाएगी।

जगत सिंह ने मांगी विधायकों को मांगी झंडी और कार्यालय

कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने प्रदेश के विधायकों को सरकारी विश्राम गृहों में कार्यालय मुहैया करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्य सचिव, जिला परिषद, सचिवों, कुलपतियों को वाहनों में झंडी लगाने की अनुमति है, मगर विधायकों को नहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विधायक संस्था लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि विधायकों की संस्था को बचाने के लिए सदन में पक्ष और विपक्ष दोनों को मिल बैठकर सोचना होगा। उन्होंने अंग्रेजों के समय की प्रशासनिक प्रणाली को बंद करने की बात कही। नेगी आज विधानसभा में बदलते परिवेश में विधायकों की भूमिका को लेकर एक निजी संकल्प सदन में प्रस्तुत कर रहे थे। विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार से विधायकों को झंडी देने के मामले में जल्द निर्णय लेने की बात कही। जगत सिंह नेगी ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का हिस्सा है। विधायक अपने-अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि लोकतंत्र में विधायक की संस्था कमजोर हो रही है। इन्हें डीसी और मंत्रियों के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। विधायक की भूमिका क्या हो, इस पर चिंतन की आवश्यकता है। नेगी ने कहा कि वार्ड का चुनाव तक न जीत पाने वाले नेता अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तक बनाए जाते हैं। इनके नाम शिलान्यास व उद्घाटन की पट्टिकाओं पर लगते हैं, मगर विधायकों के नहीं। जगत सिंह नेगी ने कहा कि सूचना के अभाव में विधायकों को आरटीआई के तहत जानकारी लेनी पड़ती है। अगर शिलान्यासों पर विधायकों को नाम नहीं लगाए जा सकते तो इस प्रथा को बंद कर देना चाहिए।

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