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बच्ची को टायफायड था ही नहीं और बड़सर अस्पताल की लैब ने दी पॉजिटिव रिपोर्ट

आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने अस्पताल परिसर में की नारेबाजी, बीएमओ पहुंचे मनाने

बच्ची को टायफायड था ही नहीं और बड़सर अस्पताल की लैब ने दी पॉजिटिव रिपोर्ट

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बड़सर। सिविल हॉस्पिटल बड़सर (Civil Hospital Barsar)  में  उस समय जमकर हंगामा हो गया जब अस्पताल की लैब ने एक बच्ची की टायफायड पॉजिटिव (Typhoid Positive) होने की रिपोर्ट दे दी, जबकि उसे टायफायड था ही नहीं। रिपोर्ट आने के बाद बच्ची तीन दिन टायफायड की दवाएं भी खाती रहीं। बताया जा रहा है कि लड़की को गले में खराश और बुखार (Sore Throat and Fever) की शिकायत थी। इसी वजह से उसके परिवार वाले उसे बड़सर अस्पताल में लेकर गए थे। इसी बीच लड़की के परिजनों ने पाया कि बच्ची को तो ऐसी कोई शिकायत ही नहीं है।

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उन्होंने अपना शक मिटाने के लिए अस्पताल परिसर से बाहर एक लैब में टैस्ट करवाया तो इस बार उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। वहीं परिजनों ने अपनी संतुष्टी के लिए किसी अन्य लैब से भी टैस्ट करवाया तो वहां भी उसकी रिपोर्ट नेगेटिव (Report Negative) ही आई। इस रिपोर्ट के आने के बाद उस लड़की के परिजन शिकायत लेकर बड़सर अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने स्वास्थ्य अधिकारियों से इसका कारण जानना चाहा। तभी इसी दौरान आम आदमी पार्टी के मीडिया प्रभारी रमेश शर्मा अपने समर्थकों को लेकर अस्पताल पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी।

जिंदगियों से नहीं होने देंगे खिलवाड़ : रमेश

आम आदमी पार्टी के मीडिया प्रभारी रमेश ने कहा कि इस अस्पताल में गलत रिपोर्ट देकर जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। तभी बीएमओ बड़सर (BMO Barsar) भी मौके पर पहुंच गए और भीड़ को शांत करवाने का प्रयास किया। वहीं बच्ची के पिता सतीश ने कहा कि उसने जब मेडिकल एक्सपटर्स से बात कि तो उन्होंने बताया कि ऐसा संभव ही नहीं है कि तीन दिन में टायफायड की रिपोर्ट नेगेटिव आ जाए। वहीं इस संबंध में बीएमओ बड़सर ने कहा कि टैस्ट के दौरान ब्लड मार्कर आ सकते हैं। मगर इनके द्वारा बीमारी कन्फर्म नहीं की जा सकती। इसके लिए ब्लड कल्चर करवानी पड़ती है। डाक्टर (Doctor) के इलाज से मैं संतुष्ट हूं और अगर किसी अन्य सीनियर डॉक्टर से राय ली जाएगी, तो उनका भी यही जवाब होगा। उन्होंने कहा कि आप फिर भी संतुष्ट नहीं हैं तो लिखित शिकायत की जाए।

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