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रामलीला के मंच पर सूर्पणखा ने गाया फिल्मी गाना- लक्ष्मण को रिझाने का वीडियो वायरल, छिड़ी बहस
Viral Video: इन दिनों जगह -जगह पर रामलीला का मंचन हो रहा है। डिजिटल युग में रामलीला की प्रस्तुतियों में भी कई तरह के नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं—कहीं संवादों में आधुनिकता लाई जा रही है, तो कहीं संगीत और लाइटिंग के जरिए मंचन को ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है। जहां एक तरफ एआई (AI) से बनी रामायण के वीडियो युवा पीढ़ी को पौराणिक कथाओं से जोड़ने का काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रामलीला के पारंपरिक मंचन में हो रहे आधुनिक प्रयोगों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रामलीला के दौरान सूर्पणखा का किरदार निभा रही एक कलाकार मंच पर 90 के दशक का मशहूर बॉलीवुड गाना ‘आपके प्यार में हम संवरने लगे…’ गाती नजर आ रही हैं।
अगर सूर्पणखा ने भी इतने प्यार से अपने प्रेम का इज़हार किया होता, तो लक्ष्मण जी उसकी नाक कभी नहीं काटते! 😂❤️🤣 pic.twitter.com/ZhMGeyOLmz
— HasnaZarooriHai🇮🇳 (@HasnaZaruriHai) October 14, 2026
सूर्पणखा-लक्ष्मण प्रसंग का बदला अंदाज़
रामायण में पंचवटी के सूर्पणखा प्रसंग को एक बिल्कुल अलग और अनोखे अंदाज में दिखाया गया है। मंच पर कलाकार सूर्पणखा के रूप में लक्ष्मण के सामने खड़ी होकर अपनी भावनाओं को जताने के लिए फिल्मी गीत का सहारा लेती हैं। मंचीय रोशनी, आधुनिक संगीत और कलाकार की इस प्रस्तुति ने इस दृश्य को पारंपरिक रामलीला से काफी अलग बना दिया।
वीडियो में इस्तेमाल किया गया गाना ‘आपके प्यार में हम संवरने लगे’ हिंदी फिल्म का एक लोकप्रिय रोमांटिक गीत है। रामलीला जैसे धार्मिक मंच पर इस गाने के इस्तेमाल ने दर्शकों और सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लिया। माना जा रहा है कि आयोजकों ने नाटक में हास्य, मनोरंजन और नाटकीय प्रभाव (dramatic effect) बढ़ाने के लिए इस गाने को शामिल किया था।
सोशल मीडिया पर दो गुटों में बंटे लोग
वीडियो के वायरल होते ही यूजर्स के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं- कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और मंचीय कला का एक हिस्सा मान रहे हैं। उनका कहना है कि आज के समय में दर्शकों को जोड़े रखने के लिए ऐसे प्रयोग किए जाते हैं। वहीं, बहुसंख्यक लोगों ने धार्मिक प्रसंगों में फिल्मी गीतों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। दर्शकों का कहना है कि धार्मिक पात्रों के संवाद और गीतों का चयन कथा के मूल भाव और मर्यादा के अनुरूप ही होना चाहिए।एक सोशल मीडिया यूजर ने नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा:”रामायण और हमारे महाकाव्यों में बदलाव करना किसी के बस में नहीं है। अपनी मर्जी से उसमें फिल्मी गीतों को जोड़कर उसे ‘प्रभावी’ या मनोरंजक बनाने का प्रयास सही नहीं है। इससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचती है।
पंकज शर्मा
