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अखबार उद्योग को 4500 करोड़ का घाटा हुआ, सरकारी मदद बिना होगा और 15,000 करोड़ का घाटा: INS

अखबार उद्योग को 4500 करोड़ का घाटा हुआ, सरकारी मदद बिना होगा और 15,000 करोड़ का घाटा: INS

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नई दिल्ली। देशभर में जारी कोरोना वायरस लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) के दौरान तमाम उद्योगों को काफी नुकसां उठाना पड़ रहा है। लॉकडाउन के चलते तमाम उद्योग बंद पड़े हैं, जिसके चले उन्हें भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इस दौरान एक उद्योग ऐसा भी है, जिसे लॉकडाउन के दौरान खुला रखने की इजाजत दी गई है, इसके बावजूद भी इस उद्योग को करोड़ों रूपए का नुकसान सहन करना पड़ा है। हम बात कर रहे हैं, अखबार उद्योग (Newspaper industry) के बारे में। दरअसल इंडियन न्यूज़पेपर सोसायटी (आईएनएस) ने सरकार से अखबार उद्योग को राहत देने की मांग की है। बतौर सोसायटी, उद्योग को दो महीनों में 4,000-4,500 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है और सरकारी मदद के बिना छह-सात महीनों में 15,000 करोड़ रूपए का नुकसान हो सकता है।

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बतौर आईएनएस, दो साल तक कर राहत और न्यूजप्रिंट पर 5% कस्टम ड्यूटी हटाई जानी चाहिए। 800 से ज्यादा समाचार पत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले आइएनएस (INS) का कहना है कि पहले ही हो चुके नुकसान का समाचार पत्र उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े 30 लाख कामगारों और कर्मचारियों पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ा है। आईएनएस के मुताबिक, अखबार प्रत्यक्ष रूप से 9 से 10 लाख और अप्रत्यक्ष रूप से 18-20 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराते हैं। पिछले कई हफ्तों के दौरान व्यापक नुकसान और नकदी संकट के चलते संस्थानों को अपने कर्मचारियों और वेंडरों को वेतन देने तक में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आइएनएस ने सरकार से समाचार पत्र प्रतिष्ठानों को दो साल का टैक्स हॉलीडे उपलब्ध कराने, ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (बीओसी) की विज्ञापन दरों में 50 फीसद की बढ़ोतरी और प्रिंट मीडिया के लिए बजट में सौ फीसद की बढ़ोतरी करने का अनुरोध भी किया है।


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