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बिजली संकट से जूझ रहे देश में हिमाचल जलाएगा बल्ब, जानिए इसके पीछे की वजह

हिमाचल में नहीं होगा ब्लैक आउट

बिजली संकट से जूझ रहे देश में हिमाचल जलाएगा बल्ब, जानिए इसके पीछे की वजह

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शिमला। इन दिनों पूरा देश बिजली संकट से जूझ रहा है। ऊर्जा मंत्री आरके सिंह (RK Singh) भी कह चुके हैं समस्या गंभीर है। गृहमंत्री अमित शाह (HomeMinister Amit Shah) बिजली संकट को लेकर बैठक कर चुके हैं। देश के कई ताप विद्युत संयंत्र कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। देश में देश में 135 कोयला आधारित बिजली संयंत्र हैं। जो एक अनुमान के मुताबिक बिजली उत्पादन का कुल 66 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। कई बिजली उत्पादन घरों में एक दिन का कोयला बचा हुआ है। इसके चलते यूपी, बिहार , दिल्ली समेत तमाम राज्यों में बिजली संकट का खतरा बना हुआ है। लेकिन, एक तरफ जहां पूरा देश बिजली की कमी से जूझ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ हिमाचल (Himachal) में बिजली की कटौती नहीं की जा रही है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। आइए जानते हैं।

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पनबिजली के कारण हिमाचल को राहत

दरअसल, हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में बिजली उत्पादन जल विद्युत और सौर ऊर्जा से किया जाता है। हालांकि, सौर ऊर्जा को लेकर अभी कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई है, लेकिन जल विद्युत ऊर्जा क्षेत्र में हिमाचल 27,436 मेगावाट क्षमता तक का दोहन कर सकता है। अभी हिमाचल में 10,519 मेगावाट ऊर्जा का विभिन्न क्षेत्रों से दोहन किया जा रहा है, जबकि राज्य की प्रतिदिन की बिजली (Electricity) खपत महज डेढ़ हजार मेगावाट है। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों की जरूरत पूरी हो जाती है। बांकी बिजली हिमाचल अपने पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा को बेच देता है।

कुल 10 हजार मेगा वॉट उत्पादन कर रहा हिमाचल

जल विद्युत के विकास को सरकारी एवं निजी क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी से तेज गति मिल रही है। जल विद्युत विकास को नदियों पर बनी विद्युत परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित रखा है। अभी तक प्रदेश में 10,519 मेगावाट ऊर्जा का विभिन्न क्षेत्रों से दोहन किया जा रहा है। इसमें हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड 487.55 मेगावाट विद्युत, एचपीपीसीएल-165 मेगावाट, केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त उपक्रम 7,457.73 मेगावाट, हिम ऊर्जा (हिमाचल सरकार) 2.37 मेवागाट, हिम ऊर्जा निजी क्षेत्र 291.45 मेगावाट, निजी क्षेत्र की कंपनियां जो पांच मेगावाट से अधिक क्षमता वाली हैं 1,955.90 मेवागाट क्षमता की ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। अगर इसमें हिमाचल प्रदेश सरकार का भाग 159.17 मेगावाट मिला लिए जाए तो यह आंकड़ा 10 हजार 519 मेगावाट तक पहुंच जाता है।

जिसके चलते बिजली संकट के बावजूद हिमाचल में लोग आराम से बल्ब ऑन ऑफ कर रहे हैं।

पड़ोसी राज्यों को बेच देता है बिजली

वहीं, अपनी खपत के बाद बाकी बचे बिजली को हिमाचल पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग माध्यम से बेच देती है। इस समय बिजली के एक यूनिट का औसतन दाम 12 रुपये तक मिल रहा है। एक से डेढ़ माह में हिमाचल को बिजली के मिलने वाले दाम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक अनुमान के अनुसार हिमाचल अन्य राज्यों को 80 लाख यूनिट बिजली रोजाना बेच रहा है। हालांकि ठंड बढ़ने के कारण अब बिजली उत्पादन धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है और घरेलू उपभोक्ता की खपत बढ़ने लगी है। इसी कारण अब बिजली बेचने की दर में कमी आई है। इससे पहले हिमाचल 300 लाख यूनिट रोजाना बिजली बेचता था।

सौर ऊर्जा में नई संभावनाएं तलाश रहा हिमाचल

अब राज्य सौर ऊर्जा के तरफ भी अपना रूझान बढ़ाना शुरू कर चुका है। इसके लिए सरकार काफी योजनाएं लेकर आई है। सरकारें सब्सिडी मुहैया करवाती है। सरकारी भवनों की छत पर ग्रिड कनेक्टेड सौर ऊर्जा पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं। शिमला शहर में ही 66 सरकारी कार्यालयों की छतों पर इस तरह के प्लांट स्थापित किए गए हैं। इन भवनों में आईजीएमसी, हाईकोर्ट भवन, सचिवालय, शिक्षण संस्थान आदि शामिल हैं. इस तरह के प्लांट लगने से इन कार्यालयों में बिजली के बिलों की बचत हुई है। इन प्लांट को लगाने में 60 फीसदी सब्सिडी केंद्र सरकार और 40 फीसदी सब्सिडी प्रदेश सरकार की तरफ से दी गई। हिम ऊर्जा द्वारा 23.25 मेगावाट ग्रिड कनेक्टेड परियोजनाएं अब तक स्थापित की जा चुकी हैं। शिमला शहर के अलावा कई जिलों के पंचायत भवनों से लेकर स्कूल, कॉलेज और निजी भवनों में भी इस तरह के प्लांट लगाए गए हैं।

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