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पहले मिला विस्थापन का दंश, फिर मिली जमीन पर भू माफिया ने जमाया कब्जा, प्रशासन के द्वार पहुंचे पीड़ित

भू माफिया ने फर्जी दस्तावेज बनाकर बेची पौंग बांध विस्थापितों की जमीन

पहले मिला विस्थापन का दंश, फिर मिली जमीन पर भू माफिया ने जमाया कब्जा, प्रशासन के द्वार पहुंचे पीड़ित

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धर्मशाला। देश के राज्य राजस्थान के एक भू माफिया ने पौंग बांध विस्थापितों की आवंटित जमीन फर्जी दस्तावेज (fake documents) बनाकर बेच दी है। पौंग बांध विस्थापितों ने इस संदर्भ में डीसी कांगड़ा डॉ निपुण जिंदल व पलिस अधीक्षक डॉ खुशहाल शर्मा से शिकायत की। उन्होंने प्रदेश सरकार से भू माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने और जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की है।

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प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति विधायक होशियार सिंह ने बताया कि राजस्थान के भू माफिया ने चार पौंग बांध विस्थापितों की जमीन के जाली दस्तावेज बनाकर बेचा दिया है। चारों परिवार गहरे सदमे हैं। उन्होंने बताया कि चारों विस्थापित बूढ़े हो चुके हैं और चारों को जमीन राजस्थान में आवंटित है, जिसकी खेती से उनकी रोजी रोटी चलती थी। अब उनके पास रोजी रोटी का कोई साधन नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को भी ज्ञापन सौंपा
जाएगा ताकि पौंग बांध विस्थापितों को न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि एक साल पहले थाना नौख जिला जैसलमेर में दोषियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी। उन्होंने बताया कि अब दोषियों के खिलाफ आरोप प्रमाणित हो चुके हैं। उक्त विस्थापितों को उनकी भूमि पुलिस कब्जा दिलाकर वापिस की जाए ताकि वह अपने परिवारों का भरण पोषण कर सकें।

वहीं, प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति के प्रधान हंस राज ने बताया कि भू माफिया ने पौंग बांध विस्थापित प्रकाश चंद पुत्र किरडू राम गांव तलाड़ा तहसील नूरपुर, गोरखी राम पुत्र बेली राम गांव भुगनाडा तहसील नूरपुर, बलदेव चंद पुत्र राम सरण गांव सुखार तहसील नूरपुर और संजीव कुमार पुत्र साहब सिंह गांव भटोली फकौरियां, तहसील हरिपुर, जिला कांगड़ा की जमीन राजस्थान में फर्जी दस्तावेज बनाकर बेच दी है। उन्होंने कहा कि यह जमीन उनकी आय का साधन है। विस्थापितों को हर वर्ष कम से कम पांच लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों को भू माफिया द्वारा धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने प्रशासन से विस्थापितों को जमीन वापिस करने और उनकी जान मान की रक्षा करने की व्यवस्था करने की मांग की है।

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