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भूमि में छिपा होता है धन आगमन का स्रोत, घर बनाते समय इन बातों का रखें ख्याल

भूमि में छिपा होता है धन आगमन का स्रोत, घर बनाते समय इन बातों का रखें ख्याल

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आपने देखा होगा कि किसी-किसी को बिना कुछ खास किए इतना धन मिल जाता है कि देख कर हैरानी होती है। ऐसा धन आकस्मिक रूप से मिलता है, चाहे वह पैतृक धन हो या फिर अनायास ही किसी का दिया हुआ। अचानक ही धनागम के अनेकों स्रोत (source of money) बन जाते हैं। क्या आपको पता है कि इस तरह के धनागमन का एक कारण वह घर भी हो सकता है जिसमें वह व्यक्ति रहता है। जी हां, धनआगमन का एक स्रोत लक्ष्मीवान भूमि भी होती है। भूमियां अनेक प्रकार के प्रभावों वाली होती हैं। घर के लिए प्लॉट (Plot) लेते समय इन बातों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए।

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जो भूमि कुंकुम, अगर, कपूर, इलायची, चंदन आदि वृक्षों से सुशोभित हो ,वह भवन निर्माण के लिए उत्कृष्ट है।
जो भूमि मूर्ख, अज्ञानी व्यक्ति के द्वारा भी शासित की जा सकती है और जहां भद्र पुरुष रहते हैं वह भूमि फलदायी है।
जहां की भूमि धातुओं के स्पंदन से शोभित हो जहां हरियाली हो और मन को शांति देने वाले वृक्षों की छाया हो वह भूमि श्रेष्ठ है।
जो क्षेत्र मीठे जल वाली नदियों और जल से भरपूर तालाबों वाला हो ,जहां वृक्षों पर प्रसन्न हो कर पक्षी गाते हों, वहां मकान बनाने से जीवन में कोई कमी नहीं रहती तथा एक से अधिक आय के स्रोत बन जाते हैं।
जिस भूमि पर बोए गए बीज बिना किसी प्रयास के अधिकता से उत्पन्न होते हों,जहां जुते हुए खेत कभी बाढ़ से नष्ट नहीं होते,आस-पास सुंदर चरागाह हों वह भूमि रहने के लिए सर्वथा उपयुक्त है।
जहां कमल,रक्त कमल, मालती ,चंपा, नीलकमल अथवा जलीय पुष्पों की भीनी सुगंध वातावरण में फैली रहे, साथ ही वह गोबर,दूध दही तथा यज्ञ की गंध धारण करती है वहां बसना आपको आकस्मिक धन लाभ देता है।
जो भूमि गर्मी में भी छूने पर ठंडी लगे, सर्दी के मौसम में गर्म रहे तथा वर्षा ऋतु में ठंडा-गर्म दोनों का ही एहसास दे ,हमारे आचार्यों ने उसे भवन निर्माण के लिए प्रशस्त भूमि कहा है।
जिस भूमि पर खड़े होने पर मंदिरों की घंटियां , मृदंग, वीणा, सितार और बांसुरी की आवाज सी महसूस हो अथवा हाथी घोड़े या समुद्र की लहरों के जैसा आभास मिले वह अत्यंत उत्कृष्ट मानी गई है।

कहां भवन ना बनाएं –

जो भूमि भस्म,कपाल,हड्डियां बाल ,पत्थर ,चूहों के बिल अथवा बांबियों से भरी हो वह त्याज्य है। वहां घर बनाने से रह-सहा सुख चैन भी जाता रहेगा।
कम वर्षा वाली ऊंची-नीची कांटेदार बिना फल के पेड़ों वाली ,हिंसक पशुओं से भरी भूमि अच्छी नहीं होती। जिस जगह नदियां पूर्व की ओर बहती हों वहां भूल कर भी जमीन न लें क्योंकि ऐसी नदियां समय पाकर लौट सकती हैं।
जहां दुर्गंध फैली हो ,मल-सूत्र या शवों के जलने वाली दुर्गंध व्याप्त हो उस भूमि को कभी नहीं लेना चाहिए।
रूखी-सूखी तथा सदैव गर्म या ठंडी रहने वाली भूमि भी अच्छी नहीं होती।
जिस भूमि पर खड़े होने पर गीदड़ ,कुत्ता , गधे जैसी ध्वनि आए अथवा पास ही कहीं झरने के बहने का शोर गूंजता हो ऐसी भूमि कदापि लेने योग्य नहीं होती।
ध्यान यह भी दें कि ऐसी जगह कभी भूमि न लें जहां पास में कभी श्मशान या कब्रिस्तान रहा हो अथवा जहां मृत शिशुओं को दफनाया जाता रहा हो। मृत आत्माओं को शांति और निर्जनता चाहिए उन्हें हलचलें अच्छी नहीं लगतीं ऐसे में वे अहित कर सकती हैं।
आवश्यक यह भी है कि हल चलवा कर जमीन की परीक्षा कर लें । यदि लकड़ी निकले तो वह घर अग्निमय होगा और उसमें आग लगने का खतरा बना ही रहेगा। यदि ईंटें निकलें तो अच्छा धनागम होगा। कंकड़ निकलें तो कल्याण होगा, हड्डियां निकलें तो कुल नाश और सर्प निकले तो चोरी का भय होता है।
मिट्टी के अंदर से शंख मूंगा , मणि आदि दिखाई पड़े तो वह भूमि लक्ष्मीवान होती है। ऐसी भूमि आपको सदा धनवान रखेगी।

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