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सुजानपुर में अनोखा कांड: कमरे में छिपा कर रखी 20 गांवों की डाक-तलाशी में खुला राज
Himachal News: एक डाकिया, जो हर दिन डाकघर से लोगों की चिट्ठियां और ज़रूरी दस्तावेज़ तो उठा लेता था, लेकिन उन्हें उनके सही पते पर पहुँचाने के बजाय अपने कमरे में ही जमा करता रहा। इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 20 गाँवों के लोग डेढ़ साल से अपने अति-आवश्यक दस्तावेज़ों के इंतज़ार में भटकते रहे। जब इस मामले का भंडाफोड़ हुआ, तो डाक विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनता भी हैरान रह गई।मामला उपमंडल सुजानपुर के उपडाकघर भलेठ के अंतर्गत आने वाली करोट डाक शाखा का है, जहाँ विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए आरोपी ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस एमडी) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कमरे से बरामद हुआ डेढ़ साल की डाक का ढेर
विभागीय छानबीन के दौरान आरोपी कर्मचारी के कमरे से भारी मात्रा में अनबांटी डाक बरामद की गई है। इसमें आम चिट्ठियों के साथ-साथ सरकारी दस्तावेज़, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसी अति-संवेदनशील डाक सामग्री शामिल है। मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला यह कर्मचारी लंबे समय से डाक घर से डाक उठा तो रहा था, लेकिन उसे लोगों तक पहुँचाने की ज़हमत नहीं उठा रहा था।
औचक निरीक्षण में खुला राज
मामले का पर्दाफ़ाश तब हुआ जब डाक विभाग के निरीक्षक आशीष शर्मा करोट शाखा के औचक निरीक्षण पर पहुँचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कई डाक लंबे समय से होल्ड पर रखी गई हैं।जब लिफ़ाफ़ों पर दर्ज फोन नंबरों पर संपर्क किया गया, तो लोगों ने बताया कि उन्हें डाक मिली ही नहीं।वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें डाक तो मिल गई थी, लेकिन उनसे कोई प्राप्ति हस्ताक्षर (Acknowledge Sign) नहीं करवाए गए थे।संदेह गहराने पर जब निरीक्षक ने डाकिए के कमरे की तलाशी ली, तो वहाँ पिछले डेढ़ साल से जमा डाक का एक बड़ा ढेर बरामद हुआ।
विभाग ने शुरू की कड़ी कार्रवाई और डाक वितरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने दोषी कर्मचारी को तुरंत निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की विभागीय जाँच शुरू कर दी है। विभाग इस बड़ी लापरवाही का पता लगाने में जुटा है।
अशोक राणा

