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हिमाचल के 2,500 से अधिक #SMC शिक्षकों को Supreme Court से फिर बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने एसएमसी अध्यापकों की याचिका स्वीकार की, हिमाचल शिक्षक महासंघ ने जताया आभार

हिमाचल के 2,500 से अधिक #SMC शिक्षकों को Supreme Court से फिर बड़ी राहत

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शिमला। हिमाचल के 2500 से अधिक एसएमसी (#SMC) शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से एक बार फिर बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने एसएमसी शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए हिमाचल हाईकोर्ट के नियुक्तियों को खारिज करने के आदेश को पलट दिया है। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई करते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए। हिमाचल शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार, महामंत्री विनोद सूद, संगठन मंत्री पवन मिश्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. मामराज पुंडीर व मीडिया प्रभारी दर्शन लाल सहित सभी सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट, सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) व शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर का आभार व्यक्त किया है।


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बता दें कि इससे पहले 8 अक्टूबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के नियुक्तियों को खारिज करने के आदेश पर रोक लगा दी थी। मामले की आगामी सुनवाई इस माह तय की थी। दरअसल हिमाचल हाईकोर्ट ने सभी 2613 अस्थाई नियुक्तियों को रद करने के आदेश दिए थे जिसके बाद प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट (Himachal High Court ) के फैसले पर रोक लगा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने एसएमसी शिक्षकों और सरकार की तरफ से दी गई दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से एसएमसी शिक्षकों को बड़ी राहत मिली थी। इसके बाद सरकार ने भी इस सत्र में एसएमसी शिक्षकों की सेवाएं जारी रखने और बकाया वेतन देने का फैसला लिया था। गौर हो कि एसएमसी शिक्षक प्रदेश के दूर दराज क्षेत्रों में काफी वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने स्‍कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए अस्‍थाई तौर इनकी तैनाती की थी।

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प्रार्थी कुलदीप कुमार और अन्यों ने सरकार की ओर से स्टॉप गैप अरेंजमेंट के नाम पर की गईं एसएमसी भर्तियां को हाईकोर्ट (High Court) में यह कहते हुए चुनौती दी थी कि इन शिक्षकों की नियुक्ति गैरकानूनी हैं और यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है।प्रार्थियों की यह भी दलील थी कि इन शिक्षकों की भर्तियां आरएंडपी नियमों (R&P Rules) के विपरीत हैं। हाईकोर्ट ने प्रार्थियों की याचिका को स्वीकारते हुए ना केवल इन अध्यापकों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश दिए थे, बल्कि यह भी स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार 6 महीने के भीतर नियमों के तहत शिक्षक नियुक्त करने को कहा था।

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