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हिमाचल: वाटर स्पोर्ट्स के ओपन टेंडर स्थानीय युवाओं के साथ धोखा, कांग्रेस ने दी ये चेतावनी

गोविंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स टेंडर में रखी शर्तें पूरा नहीं कर सकते स्थानीय युवा

हिमाचल: वाटर स्पोर्ट्स के ओपन टेंडर स्थानीय युवाओं के साथ धोखा, कांग्रेस ने दी ये चेतावनी

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ऊना। कुटलैहड़ ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष विवेक शर्मा ने गोविंद सागर झील में एडवेंचर एक्टिविटीज के तहत शुरू की जा रही वाटर स्पोर्ट्स (Water Sports) के ओपन टेंडर पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और स्थानीय विधायक विधानसभा क्षेत्र के युवाओं के साथ ओपन टेंडर करके धोखा कर रहे है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस टेंडर (Tender) में जो शर्तें रखी गई हैं, उन्हें विधानसभा क्षेत्र के युवा पूरा नहीं करते हैं। लिहाजा यह टेंडर बरबस ही किसी भी बाहरी व्यक्ति को ही दिया जा सकेगा।

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उन्होंने कहा कि टेंडर में लगाई गई शर्तों के मुताबिक जिसकी आयकर विभाग में सबसे ज्यादा रिटर्न होगी, उसे काम करने का मौका दिया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह टेंडर ओपन टेंडर है जिसे कोई भी व्यक्ति भर सकता है। इसके अतिरिक्त इसी टेंडर में लगाई गई शर्त के मुताबिक जो नाव (Boat) झील में उतारी जाएगी, उसकी कीमत 30 लाख रुपये के आसपास बनती है। ऐसे में शायद ही कोई युवा इतनी बड़ी इन्वेस्टमेंट कर पाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय ब्लॉक कांग्रेस (Congress) कमेटी ही नहीं बल्कि कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र का हर व्यक्ति यह चाहता है कि इस टेंडर को तुरंत प्रभाव से रद्द करते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार देने की नीति अपनाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश सरकार ने स्थानीय युवाओं को वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों में रोजगार या स्वरोजगार देने के लिए कोई नीति न बनाई तो ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को मजबूरन सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करना होगा।

स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए काम

कुटलैहड़ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विवेक शर्मा ने उदाहरण देते हुए कहा कि धर्मशाला और मैकलोड़गंज में जितने भी टैक्सी चालक काम कर रहे हैं वह सभी स्थानीय लोग हैं, वहां किसी भी बाहरी व्यक्ति को काम करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस टेंडर को रद्द करते हुए केवल मात्र स्थानीय लोगों और विशेषकर गोविंद सागर झील से जुड़े हुए लोगों को लाभ दिया जाए। जो लोग गोविंद सागर झील के चलते विस्थापित हुए या जिनकी संपत्ति और झील में समा गई उन लोगों के बारे में सरकार को सोचना चाहिए।

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