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Tibetan के चुनाव में US-China खेल रहे खुफ़िया खेल !

तिब्बती राजनीति में अपना प्रभुत्व हासिल करने के लिए चल रहा सब

Tibetan के चुनाव में US-China खेल रहे खुफ़िया खेल !

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केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के चुनाव से पहले अमेरिका व चीन (US and China) एक-दूसरे को आउट करने के लिए खुफ़िया खेल में जुटे हुए हैं।केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (Central Tibetan Administration) के चुनाव अगले साल के शुरूआत (Elections Early Next Year) में होने हैं। इससे पहले अमेरिका व चीन, तिब्बती राजनीति में अपना प्रभुत्व हासिल (Gain Dominance in Tibetan Politics) करने के लिए अपने-अपने हिसाब से बोली लगा रहे हैं। इन दोनों का ये खुफ़िया खेल भारतीय प्रशासन (Indian Administration) के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इस खुफ़िया खेल (Fox Game)के माध्यम से अमेरिका और चीन-आधारित संगठन तिब्बती धर्मगुरू के कद को विस्तारित करने के लिए पैसे का खेल रच रहे हैं।


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यहां ये बताना जरूरी है कि अमेरिका में तीन साल दो ट्रस्टों का गठन इस इरादे से किया गया था ताकि हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज स्थित सामाजिक और संसाधन विकास निधि (एसएआरडी) में दान हस्तांतरित किया जा सके। एसएआरडी (SARD) वर्ष1997 में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) द्वारा स्थापित एक गैर.लाभकारी संगठन है। इस संगठन ने अमेरिका से मिली मदद को सीधे निर्वासित तिब्बतियों (Tibetan Refugees) में बांटने के बजाए व्यापार और पुनर्निर्माण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए मैक्लोडगंज (Mcleodganj) स्थित तिब्बतियों को ऋण की पेशकश की। इन दोनों ही अमेरिकी ट्रस्टों के चेयरमैन अगले साल होने वाले केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के चुनाव में कूद रहे हैं,जोकि तिब्बती चुनावों को प्रभावित करने का एक सीधा अमेरिकी एजेंडा कहा जा रहा है।


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अमेरिका स्थित ट्रस्टों ने एसएआरडी को कई करोड़ रूपए दिए हैं जो अंततः ऋण के रूप में हैं,और यहां तक कि कोविड-19 (Covid-19) से लड़ने के लिए राहत के रूप में वितरित किया गया था। इसके अलावा, अमेरिकी ईसाई मिशनरियों ने भी स्पष्ट रूप से एसएआरडी को भी इस बात के लिए वित्त पोषित किया है कि अगले साल सीटीए चुनावों (CTA Polls) के लिए अमेरिका स्थित तिब्बतियों के लिए भी धर्म परक्राम्य है।इसी तरह, चीन (Chinese) भी सीटीए के चुनावों को प्रभावित करने की दिशा में अपने एजेंडे के तहत काम कर रहा है। इसके लिए कहा जा रहा है कि चीन ने अमेरिका से अलग एक तरकीब अपनाई और चीनी राष्ट्रीय लुओ सांग उर्फ चार्ली पेंग को सीटीए चुनावों में धन उगाही के लिए इस्तेमाल किया। 1,000 करोड़ रूपए से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में गिरफ्तार सांग ने हवाला के माध्यम से इस राशि को तिब्बती नेतृत्व को हस्तांतरित किया था। यानी अमेरिका और चीनी दोनों खुफ़िया एजेंसियां सीटीए चुनावों को प्रभावित करने की अपने-अपने तरीके से कोशिश कर रही हैं, इस तथ्य के बावजूद कि भारत ने तिब्बती शरणार्थियों की देखभाल में सबसे अधिक योगदान दिया है।

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