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विधायक निधि का पैसा गया कहां? देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह पर विजिलेंस का सबसे बड़ा एक्शन
Vigilance registers FIR against Ex MLA Hoshiyaar Singh: कांगड़ा जिले के देहरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ विजिलेंस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग के मामले में पूर्व विधायक के खिलाफ विजिलेंस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई एक विस्तृत प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद अमल में लाई गई है।
सरकारी रिकॉर्ड में विधायक ऐच्छिक निधि का लाभार्थी दर्शाया
विजिलेंस ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की शिकायत खुद पूर्व विधायक होशियार सिंह की एक कंपनी के कर्मचारियों ने की थी। दिलचस्प बात यह है कि इन कर्मचारियों को ही सरकारी रिकॉर्ड में विधायक ऐच्छिक निधि का लाभार्थी दर्शाया गया था।शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेजों और लाभार्थियों के बैंक खातों की गहनता से पड़ताल की। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं समेत कई अन्य लोगों के आधिकारिक बयान भी दर्ज किए गए।
बिना आवेदन स्वीकृत हुई राशि, नकद वापस लेने का आरोप
विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
बिना आवेदन सहायता: वर्ष 2023 और 2024 के दौरान कुछ लोगों के नाम पर विधायक ऐच्छिक निधि के तहत आर्थिक सहायता स्वीकृत और जारी की गई थी। लेकिन संबंधित लाभार्थियों ने बयान दिया कि उन्होंने ऐसी किसी सहायता के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था।
नकद वसूली का खेल: लाभार्थियों ने कथित तौर पर खुलासा किया कि उनके बैंक खातों में सरकारी राशि आने के बाद, पूर्व विधायक के निर्देशानुसार उन्होंने वह राशि बैंक से नकद निकाली और वापस पूर्व विधायक को सौंप दी।
दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड के सत्यापन से प्रथम दृष्टया यह साफ हुआ है कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के विपरीत किया गया और जिन लोगों के नाम पर राशि जारी हुई, उन्हें इसका वास्तविक लाभ नहीं मिला।
धर्मशाला विजिलेंस थाने में मामला दर्ज, बढ़ सकती हैं धाराएं
इन पुख्ता तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने धर्मशाला स्थित विजिलेंस थाना में एफआईआर संख्या 05/2026 दर्ज की है। पूर्व विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्नलिखित गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है:
धारा 409: लोक सेवक या बैंक मैनेजर आदि द्वारा आपराधिक न्यासभंग (Criminal Breach of Trust)
धारा 420: धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति सुपुर्द करने के लिए प्रेरित करना (Cheating)
विजिलेंस ब्यूरो का कहना है कि मामले की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। जांच के दौरान सामने आने वाले नए साक्ष्यों के आधार पर इस खेल में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कोई अतिरिक्त अपराध बनता है या नहीं।
रविंद्र चौधरी

