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हिमाचल: माइक्रो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीण, समझौते के बाद भी काम में बन रहे रोड़ा

प्रोजेक्ट निदेशक ने ग्रामीणों के विरोध को बताया बेबुनियाद

हिमाचल: माइक्रो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीण, समझौते के बाद भी काम में बन रहे रोड़ा

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गोहर। सराज विधानसभा क्षेत्र सुराह के लोगों में सुराह खड्ड में बनने वाले माइक्रो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहा विरोध गलत है। प्रोजेक्ट निदेशक आशीष गुप्ता ने ग्रामीणों के विरोध को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बनाने के लिए सरकार की ओर से जारी हर प्रकार के दिशा व निर्देशों का पालन किया गया है और ग्रामीणों के साथ लिखित समझौता होने के बाद ही निर्माण कार्य आरंभ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ग्रामीणों का विरोध जारी रहा तो प्रबंधन को मजबूरन कानून का सहारा लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

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प्रोजेक्ट निदेशक आशीष गुप्ता ने कहा कि सरकार व सभी विभागों की अनुमतियां उनके पास है। ग्रामीण सिर्फ खड्ड के पानी को लेकर बवाल मचा रहें हैं। जबकि प्रोजेक्ट प्रबंधन के साथ हुए इकरार में ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा से अधिक पानी देने की बात हुई है। उन्होंने बताया कि नदी बचाओ समिति सुराह ने उपमंडलधिकारी अधिकारी थुनाग के समक्ष एक साल पहले प्रोजेक्ट के काम में बाधा नहीं डालने की बात कही थी और अब गत दिनों से ग्रामीण हकीकत को दरकिनार कर विरोध पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट साइट के लिए वन विभाग ने 0.5655 हेक्टेयर वन भूमि को उपयोग करने के लिए वर्ष 2016 में स्वीकृती दी है, जिसे ग्रामीणों के द्वारा गलत बताना निंदनीय है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट साइट पर काम को रुकवाने से प्रोजेक्ट प्रबंधन को हर दिन लाखों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके लिए ग्रामीण पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट की ओर से ग्रामीणों को साठ प्रतिशत के बजाए सौ प्रतिशत रोजगार दिया जा रहा है, फिर भी ग्रामीण अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि ग्रामीण प्रस्तावित प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा ना डाले।

डीएफओ नाचन तीर्थराज धीमान ने बताया कि सुराह खड्ड पर बनने वाले 1.5 मेगावाट विद्युत प्रोजेक्ट केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार से स्वीकृत हैं। प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए वन विभाग द्वारा 5 वर्ष पहले फॉरेस्ट क्लीयरेंस दे दी गई है। प्रोजेक्ट प्रबंधन ने सभी शर्तों को माना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और प्रोजेक्ट प्रबंधन मिलकर प्रोजेक्ट निर्माण का हल निकालें। एसडीएम थुनाग पारस अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय पंचायत ने कंपनी को करीब 13 साल पहले प्रमाण पत्र जारी कर दिया था, लेकिन अब हाल ही में पंचायत से उसे रद्द करने के बारे में एक और प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी को कानूनन प्रोजेक्ट के निर्माण को लेकर सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। प्रशासन की ओर से कंपनी को स्वीकृत भूमि वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त निशानदेही में बता दी गई है।

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