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विजय ने अपने दम पर जिंदा रखा ..
जज़्बा हो तो इंसान खुद अपना रास्ता बना लेता है, लेकिन जब हुनर के बावजूद सहारा न मिले, तो वही सबसे बड़ा मलाल बन जाता है। जिला कांगड़ा के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बैंबू आर्टिस्ट विजय मेहरा ने विलुप्त होती बैंबू कला को अपने दम पर ज़िंदा रखा है। आत्मनिर्भर भी बने, दूसरों को रोज़गार से भी जोड़ा, लेकिन आज भी एक ही मलाल है सरकार की तरफ़ से कोई ठोस सहयोग नहीं। करीब 25 साल पहले शौक के तौर पर शुरू हुई बैंबू आर्ट आज विजय मेहरा का जीवन बन चुकी है। नौकरी न मिलने पर उन्होंने बांस को ही अपना सहारा बनाया। बांस से आकर्षक शो-पीस, देवी-देवताओं की प्रतिकृतियां और मंदिरों के मॉडल तैयार कर विजय मेहरा आज अपने परिवार का गुज़ारा कर रहे हैं।

