-
Advertisement
शिमला युग म#र्डर केस में हाईकोर्ट ने पलटा जिला अदालत का फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद, एक बरी
Shimla Yug Murder Case: हिमाचल हाई कोर्ट ने शिमला के बहुचर्चित युग हत्याकांड के बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने मामले में तीन दोषियों को मृत्यु दंड दिए जाने के जिला अदालत के फैसले को पलटते हुए दो को उम्रकैद में बदलने का फैसला सुनाया है। मंगलवार को न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।
पूरी उम्र जेल में रहेंगे चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी
हाईकोर्ट ने 11 अगस्त को युग हत्या मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। इसमें अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दोषियों के व्यवहार, उम्र और परिवार की स्थिति को देखते हुए अदालत से मृत्यु दंड ना दिए जाने की मांग की गई थी। अब चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी पूरी उम्र जेल में रहेंगे, जबकि तेजिंदर पाल को अदालत ने बरी कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाएंगे विनोद गुप्ता
युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा- 1 वर्ष के बीत जाने के बाद की युग को न्याय नहीं मिला है और आज हाई कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है जिससे वह खुश नहीं है। युग के दोषियों को फांसी दे देनी चाहिए थी लेकिन इतना वक्त बीत जाने पर भी दोषी जिंदा है। युग को न्याय दिलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाएंगे और तुरंत फांसी की सजा देने की न्यायालय में मांग करेंगे।
5 सितंबर 2018 को तीन दोषियों को सुनाई थी सजा-ए-मौत
फिरौती के लिए चार साल के मासूम युग की अपहरण के बाद निर्मम हत्या मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिमला की अदालत ने तीनों दोषियों को 5 सितंबर 2018 को फांसी की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने इस अपराध को दुर्लभ में दुर्लभतम श्रेणी का करार दिया था। अब हाईकोर्ट ने फैसला पलट दिया है।
पानी से भरे टैंक में फेंक दिया था मासूम को
14 जून, 2014 को शिमला के राम बाजार से तीन लोगों ने फिरौती के लिए 4 साल के युग का अपहरण किया। अपहरण के 2 साल बाद अगस्त 2016 में भराड़ी के पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद हुआ। तीनों ने मासूम के शरीर में पत्थर बांध कर उसे जिंदा पानी से भरे टैंक में फेंक दिया था। युग के अपहरण व हत्या मामले की जांच करने वाली सीआईडी ने 25 अक्टूबर, 2016 को चार्जशीट अदालत में दायर की। 20 फरवरी 2017 से अदालत में ट्रायल शुरू हुआ। इसमें कुल 135 में से 105 गवाहों के बयान हुए और कोर्ट ने साढ़े 10 माह में ही फांसी की सजा सुना दी थी।
संजू चौधरी

