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सुप्रीम कोर्ट से सुक्खू सरकार को बड़ी राहत, नगर निकाय चुनाव में वोट दे सकेंगे विधायक
MC Mayor and Deputy Mayor Election: हिमाचल प्रदेश में स्थानीय शहरी निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव में विधायकों की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 4 जून के उस आदेश पर रोक (स्टे) लगा दी है, जिसमें विधायकों को वोटिंग के अधिकार से वंचित कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है और फिलहाल विधायकों के मतदान का अधिकार बहाल हो गया है।
क्या था हाईकोर्ट का 4 जून का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 जून को एक अंतरिम आदेश पारित किया था। इस आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया था कि पदेन सदस्य (Ex-officio members) यानी विधायक स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों (अध्यक्ष और उपाध्यक्ष) के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। हाईकोर्ट का मानना था कि इन महत्वपूर्ण पदों का चुनाव केवल जनता द्वारा चुने गए निर्वाचित पार्षदों को ही करना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया था कि नगर निकायों की सामान्य बैठकों और कमेटियों की बैठकों में विधायकों के अधिकार पहले की तरह यथावत रहेंगे।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या तर्क दिया
हाईकोर्ट के इस फैसले से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी, जिसके चलते राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सरकार ने शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर तर्क दिया कि हिमाचल प्रदेश के संबंधित स्थानीय निकाय कानूनों के तहत पदेन सदस्य (विधायकों) को इन चुनावों में मतदान करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। सरकार की दलील थी कि कानून में निहित इस प्रावधान के तहत विधायकों को उनके इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
पार्षदों ने दाखिल की थी केविएट
इस कानूनी लड़ाई में निर्वाचित पार्षद भी पीछे नहीं थे। पार्षदों की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में पहले ही एक केविएट याचिका दायर कर दी गई थी, ताकि अदालत कोई भी एकतरफा फैसला सुनाने से पहले उनका पक्ष भी सुने।सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगाने के बाद, नगर निकाय चुनावों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन में विधायकों की भूमिका को लेकर बनी अनिश्चितता फिलहाल समाप्त हो गई है। अब विधायक इन चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे, जिसका सीधा असर चुनाव के नतीजों और स्थानीय राजनीति पर पड़ेगा। इस मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सभी विस्तृत कानूनी पहलुओं और दोनों पक्षों की दलीलों पर गहनता से विचार करेगा।
पंकज शर्मा

