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ग्रीन एनर्जी से बेरोजगारी होगी खत्म, अर्थव्यवस्था भी सरपट दौड़ पड़ेगी, जानिए कैसे

ग्रीन इकोनॉमी से 5 करोड़ नई नौकरियों का होगा सृजन 

ग्रीन एनर्जी से बेरोजगारी होगी खत्म, अर्थव्यवस्था भी सरपट दौड़ पड़ेगी, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। भारत (India) फिलहाल ऊर्जा (Energy) की आपूर्ति के लिए अनवीकरणीय ऊर्जा यानी नॉन रिन्यूएबल एनर्जी पर निर्भर है। आज देश भर की कुल उर्जा आपर्ति में ताप विद्युत संयंत्र का योगदान लगभग दो तिहाई यानी 66 फीसदी से अधिक है। जिसके कारण भारत कार्बन उत्सर्जन के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है।

इधर, कॉप 26 की बैठक में भारत ने ऐलान कर दिया है कि वह साल 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को खत्म कर देगा। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इस लिहाज से भारत का ध्यान अब रिन्यूएबल इनर्जी यानी ग्रीन एनर्जी (Green Energy) पर टिक गया है। ग्रीन एनर्जी ना सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति की जरूरतों को भरपाई करेगी, बल्कि देश में करोड़ों नौकरियां भी पैदा करेगी।

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भारत ने गैर जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की क्षमता 2030 तक बढ़ाकर 500 गीगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्लूईएफ) की एक रिपोर्ट के मुताबित ग्रीन इनर्जी की तरफ भारत का झुकाव देश की अर्थव्यवस्था के लिए उठाया गया पॉजिटिव अप्रोच होगा।

डब्लूईएफ के मुताबिक, साल 2030 तक भारत में ग्रीन एनर्जी के जरिए लगभग 5 करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी। जिसका देश के आर्थिकी में 1 लाख डॉलर यानी करीबन 74 लाख करोड़ रुपए का योगदान होगा। इधर, ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल के कारण साल 2030 तक कार्बन उत्सर्जन लगभग 50 प्रतिशत तक घट जाएगा।

भारत में कार्बन उत्सर्जन में बड़ी भूमिका निभाने वालों में ऊर्जा, परिवहन, उद्योग, बुनियादी ढांचा और शहरों के अलावा कृषि जैसे पांच प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इनमें ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ने की तगड़ी संभावना है, जिससे बड़ी तादाद में नौकरियां पैदा होंगी।

ऑफ-कार्बन इकोनॉमी बनेगा भारत

डब्ल्यूईएफ के भारत और दक्षिण एशिया के उप-प्रमुख श्रीराम गुप्ता के मुताबिक, भारत में फिलहाल प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बढ़ सकता है लेकिन इसे मौजूदा स्तर से भी नीचे लाने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसे में भारत के दुनिया की पहली 5 ट्रिलियन डॉलर वाली ऑफ-कार्बन (कार्बन-मुक्त) यानी हरित अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान लगाया गया है। यह बाद में 10 ट्रिलियन डॉलर वाली दुनिया की पहली हरित अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। वहीं, भारत अब डीजल और पेट्रोल वाले वाहनों को भी साइड करना शुरू कर चुका है। ऑटोमोबाइल मार्केट में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बढ़ने लगी है।

अगले दो साल में कीमत में आएगी गिरावट 

भारत सरकार भी देश में इलेक्ट्रिक कार की बिक्री को बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। फेम स्कीम के तहत इन वाहनों पर सब्सिडी दी जा रही है। हालांकि इसके बाद भी इनकी कीमत पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। लेकिन परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भरोसा जताया है कि अगले 2 साल में इलेक्ट्रिक वाहनों के दाम घटेंगे। जिससे लोगों का रूझान बढ़ेगा।

गडकरी ने द सस्टेनेबिलिटी फाउंडेशन, डेनमार्क की ओर से कराए एक वेबिनार में कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल को चलाने की लागत पेट्रोल वाहनों की तुलना में बहुत कम है। इसलिए बहुत जल्द ही इन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जाएगा। इससे इनकी कीमत में भी कमी आएगी। उन्होंने दावा किया कि दो साल बाद पेट्रोल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां एक ही कीमत पर बिकनी शुरू हो जाएंगी।

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