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मेलों में बेचती थीं चूड़ियां, अब बन गई असिस्टेंट प्रोफेसर
मंडी। माता-पिता के साथ मेलों में चूड़ियां (Seeling Bangles in Fair) बेचकर पढ़ाई पूरी करने वाली संगीता अब असिस्टेंट प्रोफेसर बन गई हैं। कामयाबी की यह कहानी है मंडी (Mandi) जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र के शिवाबदार की रहने वाली संगीता की। संगीता (Sangita) हिंदी विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) बनी हैं।
संगीता की 12वीं तक पढ़ाई शिवाबदार स्कूल से हुई। इसके बाद डिग्री कॉलेज कुल्लू से ग्रैजुएशन की। एमए और एम.फिल एचपीयू (HPU) से किया। फिलहाल वे हिंदी में पीएचडी कर रही हैं।
संघर्षभरा रहा जीवन
संगीता एक गरीब परिवार से सम्बन्ध रखती हैं। पिता हरबंश लाल ग्रामीण रोजगार सेवक के पद पर कार्यरत हैं और अभी हाल ही में नियमित हुए हैं। इससे पहले उन्हें नाममात्र का वेतन मिलता था। माता सुरती देवी गृहिणी हैं। माता-पिता घर चलाने के लिए मेलों में चूड़ियां और खिलौने बेचा करते थे। संगीता भी परिवार का खर्च चलाने में मां-बाप का पूरा साथ देती थी। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी होने तक मेलों में चूड़ियां और खिलौने बेचने का काम किया। कभी शर्म महसूस नहीं की। फिर शिमला चली गई और पिताजी बीमार पड़ गए तो यह काम बंद करना पड़ा। पिताजी कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं।
शिक्षक या रिपोर्टर बनने का था सपना
संगीता ने बताया कि वे शिक्षक या रिपोर्टर बनना चाहती थीं। दूरदर्शन शिमला (Doordarshan Shimla) में कुछ समय एंकरिंग का काम भी किया। साथ में शिक्षक बनने की तैयारी भी चली हुई थी। अगर शिक्षक न बनती तो रिपोर्टर बन जाती। अभी भी संगीता सोशल मिडिया पर एक पेज का संचालन कर रही है, जिसके माध्यम से वो यहां की संस्कृति को प्रमोट करने का प्रयास करती है। बेटी की कामयाबी से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
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