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राजनीति का अखाड़ा बना बिजली बोर्ड फोरम का पेंशनर दिवस कार्यक्रम
वी.कुमार/मंडी। रिटायर्ड इंजीनियर को बिजली बोर्ड के पेंशनर फोरम (Pensioner Forum) का प्रधान बनाना कुछ लोगों को रास नहीं आया। उनका विरोध इतना बढ़ा कि उसने हंगामे (Pandemonium) की शक्ल ले ली और इसके कारण आखिर में चुनाव ही स्थगित करना पड़ गया। यह हंगामा रविवार को मंडी (Mandi) स्थित भीमाकाली मंदिर परिसर में देखने को मिला। सारा कार्यक्रम राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो गया। चुनाव को लेकर बिजली बोर्ड के पेंशनर अलग-अलग धड़ों में बंटकर आमने-सामने हो गए। पेंशनर दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में चुनाव को लेकर एजेंडा (Election Agenda) रखने पर पेंशनरों ने रोष जताया। माहौल गरमाने के बाद चुनाव स्थगित करने पड़े। पैनल घोषित होने के साथ ही विरोध शुरू हो गया और जमकर नारेबाजी हुई। मंच पर माइक की छीना-झपटी तक हो गई।
चुनाव संवैधानिक नहीं: खरबाड़ा
एचपीएसईबी इम्पाइज यूनियन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और फोरम सदस्य कुलदीप सिंह खरबाड़ा ने कहा कि पेंशनर दिवस (Pensioners Day) पर कार्यक्रम में चुनाव पर चर्चा ही सही नहीं थी। यहां एक पैनल पर कुछ लोग मुहर लगवाना चाहते थे। लोकतंत्र में सदन बहुमत के साथ चलता है। पेंशनर फोरम के चुनाव पिछली कमेटी को भंग किए बिना नहीं हो सकते हैं। असंवैधानिक (Unconstitutional) तरीके से चुनाव करवाए जा रहे थे। प्रधान का पद किसी रैंक विशेष के लिए रखा जाना तर्कसंगत नहीं है। हंगामे को लेकर फोरम के महासचिव चंद्र सिंह मंडयाल ने बताया कि छोटी मोटी बातें होती रहती हैं।
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