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स्वच्छ टॉप 300 शहरों की लिस्ट से शिमला बाहर, ठियोग पहली व नादौन दूसरी पायदान पर
Swachh Survekshan Ranking: पहाड़ों की रानी शिमला स्वच्छता रैंकिंग में नीचे गिरी है। प्रदेश की राजधानी होने के नाते सबसे स्वच्छ शहरों में भी शिमला तीसरी पायदान पर पहुंच गया है। पहाड़ों की रानी, अंतरराष्ट्रीय सैरगाह जैसे कई अलंकारों से सुसज्जित होने के बावजूद शिमला स्वच्छता के मामले में देश के 300 शहरों की फेहरिस्त में भी शामिल नहीं है। स्मार्ट सिटी में स्वच्छता के बदहाल होने से शहर वासियों के साथ-साथ यहां आने वाले सैलानी भी परेशान हैं। इसे अफसरशाही की नजरअंदाजी कहें अथवा लापरवाही मगर, हकीकत यह है कि शहर की सडक़ों को साफ करने के लिए करोड़ों की रकम खर्च कर खरीदी गई झाड़ू मार मशीन रिज पर लाइब्रेरी के समीप सडक़ की शोभा बढ़ा रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किए पुरस्कार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित विज्ञान भवन में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से आयोजित एक समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार प्रदान किए। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल और अन्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इससे पहले बीते रोज ही देश के शहरों की स्वच्छता रैंकिंग की फेहरिस्त जारी की गई। स्वच्छता सर्वेक्षण देश के 824 शहरों में किया गया। 2024-25 की स्वच्छता रैंकिंग में शिमला इन 824 शहरों में 347वें स्थान पर था।
अब तक की सबसे नीचे की स्वच्छता रैकिंग
यह शिमला की अब तक की सबसे नीचे की स्वच्छता रैकिंग है। इससे पहले 2019 में शिमला 198, 2020 में 65, 2021 में 76, 2022 में 56 तथा 2023 में 188 वीं रैंकिंग पर था। विडंबना तो यह है कि शिमला का पारंपरिक गौरव लौटाने की बातें तो राजनेता सालों नहीं दशकों से कर रहे हैं, मगर यह गौरव किस तरह लौटाया गया इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2015 से अब तक हिमाचल का नंबर वन स्वच्छ शहर रहने वाला शिमला इस बार प्रदेश में भी तीसरे नंबर पर खिसक गया है। प्रदेश में ठियोग पहली व नादौन दूसरी पायदान पर है।
महापौर ने सर्वे को गलत करार दिया
गौरतलब है कि अंग्रेजी हुकूमत के वक्त शिमला की सडक़ों को धोया जाता था। दस्तावेजों में यह दर्ज है। देश की सबसे पुरानी निकायों में शुमार शिमला का दायरा साल दर साल तो नहीं, मगर हरेक नगर निगम चुनाव से पहले बढ़ता रहा। कभी जेएनएनयूआरएम के तहत केंद्र से मिलने वाले अनुदान तो कभी स्मार्ट सिटी के तहत मिलने वाली केंद्रीय मदद के लिए भी दायरा बढ़ाया जाता रहा। मगर शहर का क्षेत्रफल बढऩे के बावजूद इसमें पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मचारिकयों, कचरा प्रबंधन व अन्य व्यवस्थाओं को करना प्रशासन भूल गया अथवा संसाधनों की कमी इसमें बाधा बनी। नतीजतन गुरुवार को जारी किए गए केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण के नतीजे में शहर के रिहायशी कॉलोनियों और बाजारों में सफ ाई व्यवस्था का स्तर तो सुधरा है, लेकिन घरों से कूड़ा उठाने, गीला सूखा कचरा अलग रखने, कचरे का निपटान करने, पेयजल स्रोतों की सफाई आदि की श्रेणी में शहर पीछे रह गया। कुल 7,500 अंकों में से शिमला शहर को 4798 अंक मिले हैं। उधर स्वच्छता रैकिंग को लेकर शिमला के महापौर ने सर्वे को गलत करार देते हुए कहा कि इसे चुनौती दी जाएगी।
संजू चौधरी
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