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हाईकोर्ट से सरकार को झटका: शिफ्ट नहीं होगा केएनएच- फालमा चौहान बोली, महिलाओं के हितों की जीत
High Court stays KNH Shifting: हिमाचल हाईकोर्ट ने कमला नेहरू अस्पताल को आईजीएमसी शिफ्ट करने के मामले में जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हिमाचल सरकार को बड़ा झटका दिया है।अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति संयोजक फालमा चौहान ओर से दायर की गई जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए। हाईकोर्ट ने शिफ्टिंग प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने आज राज्य नोटिस जारी कर सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई की तारीख में मामले को आगे सूचीबद्ध किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले को लेकर सुनवाई की। वहीं, हाईकोर्ट ने डेंटल कॉलेज के प्रस्ताव पर भी रोक लगा दी है। केएनएच से गायनी ओपीडी शिफ्ट करने का जनवादी महिला समिति के साथ साथ बीजेपी और माकपा भी विरोध कर रही थी। बाद में डॉक्टर भी इसके विरोध में उतर आए थे। डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल काउंसिल के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि गायनी और प्रसूति विभाग को अलग-अलग संचालित करना उचित नहीं है।
सदियों पुराना अस्पताल महिलाओं के लिए समर्पित
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति संयोजक फालमा चौहान ने कहा कि पिछले एक महीने से इस शिफ्टिंग के खिलाफ आंदोलन कर रही थी।इसके लिए उच्च न्यायालय में PIL भी दाखिल की गई थी। उन्होंने कहा कि सदियों पुराना यह अस्पताल महिलाओं के लिए सुलभ और समर्पित स्वास्थ्य केंद्र है, जिसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ उनके हितों के खिलाफ है।उन्होंने कहा कि ‘फाल्मा चौहान बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य’ मामले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने न केवल शिफ्टिंग पर रोक लगाई है, बल्कि प्रदेश सरकार से तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि क्या वह आईजीएमसी में वही सुविधाएं और स्तर प्रदान कर पाएगी जो वर्तमान में कमला नेहरू अस्पताल में महिलाओं को मिल रही हैं।
नागरिकों के सामूहिक संघर्ष की जीत
फालमा चौहान ने इस फैसले को शिमला की महिलाओं और नागरिकों के सामूहिक संघर्ष की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल सदियों से महिलाओं की सेवा में समर्पित है। सरकार को इसे शिफ्ट करने के बजाय यहीं पर बेहतर सुविधाएं प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए। हम माननीय उच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत करते हैं।अब सबकी निगाहें सरकार द्वारा तीन दिनों में पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। फिलहाल, हाई कोर्ट के इस आदेश से उन हजारों महिलाओं को बड़ी राहत मिली है जो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह से कमला नेहरू अस्पताल पर निर्भर हैं।
संजू चौधरी
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