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शिमला में पुलिस से भिड़े दृष्टिहीन, बोले- मांगें ना मानीं तो व्हीलचेयर से कर देंगे पूरा शहर ब्लॉक
Blind Association Protest: शिमला में मंगलवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर दृष्टिहीन संघ का गुस्सा फूट पड़ा। राज्य सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए दृष्टिबाधितों ने चक्का जाम कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। पिछले 976 दिनों से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे संघ ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे प्रदेश से व्हीलचेयर पर आश्रित दिव्यांग शिमला पहुंचकर शहर की सड़कों को ब्लॉक कर देंगे।
सचिवालय के बाहर चरमराई यातायात व्यवस्था
मंगलवार सुबह संघ के प्रमुख सदस्य राजेश ठाकुर के नेतृत्व में दर्जनों दिव्यांग राज्य सचिवालय के समीप पहुंचे और सड़क के बीचों-बीच धरने पर बैठ गए। अचानक हुए इस चक्का जाम से सचिवालय मार्ग सहित आसपास के पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था चरमरा गई और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारी इतने आक्रामक थे कि मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल और प्रशासन के अधिकारियों को उन्हें समझाने में पसीने छूट गए। भारी मशक्कत के बाद पुलिस यातायात बहाल करवाने में सफल हो सकी।
‘फाइल 136 दिनों से सीएम के पास, सुध लेने वाला कोई नहीं’
संघ के नेता राजेश ठाकुर ने प्रदेश सरकार और सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि उनकी जायज मांगों की फाइल पिछले 136 दिनों से मुख्यमंत्री के पास लंबित है, लेकिन कोई उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। ठाकुर ने सीएम को सीधी चुनौती देते हुए कहा, “यदि सरकार हमारे अधिकार छीनना ही चाहती है और हमारे लिए कुछ नहीं कर सकती, तो सीएम खुद ग्राउंड जीरो पर आएं और अपने हाथों से हमें जहर की पुड़िया थमा दें, ताकि हम इस रोज-रोज के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से मुक्त हो सकें।” संघ ने दोटूक कहा है कि अब वे किसी भी मंत्री, सचिव या अधिकारी से बात नहीं करेंगे; उनकी वार्ता अब सीधे सिर्फ सीएम से ही होगी।
क्या हैं दृष्टिहीन संघ की मुख्य मांगें?
बैकलॉग पदों पर भर्ती: वर्ष 1995 से लंबित पड़े दिव्यांगों और दृष्टिहीनों के बैकलॉग पदों (विशेषकर क्लास-4 श्रेणियों) को विशेष भर्ती अभियान चलाकर तुरंत भरा जाए।
सहारा योजना की बहाली: पूर्व सरकार के समय से मिल रही ‘सहारा योजना’ जैसी कल्याणकारी सुविधाओं और मासिक भत्ते को तुरंत बहाल किया जाए।
संघ का आरोप है कि सरकार दिव्यांगों को मिलने वाली पुरानी सुविधाएं और अधिकार भी छीन रही है, जो उनके जीने के अधिकार पर सीधा हमला है।
सरकार को दिया ‘अंतिम अल्टीमेटम’
दृष्टिहीन संघ ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि मंगलवार का चक्का जाम महज एक शुरुआत थी। यदि आज या कल के भीतर सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं लिया, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। अगले चरण में हिमाचल के कोने-कोने से व्हीलचेयर के सहारे जीवन काटने वाले दिव्यांगों को शिमला बुलाया जाएगा और पूरे शहर की प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया जाएगा। संघ ने साफ किया है कि इसके बाद बिगड़ने वाले हालातों की पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
संजू चौधरी
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