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लखनऊ के अहमामऊ में महिलाओं का अनोखा अखाड़ा: यहां सजता है ‘हापा’, पुरुषों की नो-एंट्री
Viral News: नवाबों के शहर लखनऊ में आज भी एक ऐसी अनूठी और पौराणिक परंपरा जीवंत है, जो महिला सशक्तिकरण और सामाजिक एकजुटता की मिसाल पेश करती है। यहाँ नागपंचमी के ठीक दूसरे दिन महिलाओं का एक खास दंगल सजता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘हापा’ कहा जाता है। इस अखाड़े की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ न तो कोई पुरुष पहलवान उतरता है और न ही दर्शक के रूप में पुरुषों को शामिल होने की इजाजत होती है।
लखनऊ में महिलाओं का अनोखा दंगल,‘हापा’ में महिलाओं ने एक-दूसरे को दी पटखनी. pic.twitter.com/pS8Dv49nOP
— आजाद भारत का आजाद नागरिक (@AnathNagrik) August 18, 2026
देवी पूजन के बाद सजता है महिलाओं का दांव-पेंच
लखनऊ के अहमामऊ गांव में हर साल आयोजित होने वाले इस उत्सव की शुरुआत सुबह देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना और पारंपरिक लोकगीतों से होती है। धार्मिक रस्मों के संपन्न होते ही गांव का माहौल अखाड़े के जोश में बदल जाता है। यहाँ किसी औपचारिक घोषणा के बिना ही महिलाएं एक-दूसरे को अखाड़े में उतरने की ललकार देती हैं और फिर शुरू होता है दांव-पेंच, ताकत और फुर्ती का रोमांचक प्रदर्शन।
पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित
‘हापा’ की सबसे दिलचस्प बात यहाँ का सख्त अनुशासन है। अखाड़े के आसपास पुरुषों की मौजूदगी पूरी तरह से प्रतिबंधित रहती है; केवल छोटे बच्चों को ही माताओं के साथ आने की अनुमति होती है। यहाँ तक कि अगर कोई पुरुष दूर किसी छत से भी इस आयोजन को देखने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत वहां से हटा दिया जाता है।
नवाबी दौर से जुड़ी है ‘हापा’ की जड़ें
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, इस परंपरा का इतिहास नवाबी दौर से जुड़ा हुआ है। उस समय नवाबी घरानों की बेगमें और महिलाएं फुर्सत के पल बिताने, मेल-मिलाप और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एकत्र होती थीं। समय के साथ-साथ इस आयोजन का स्वरूप बदलता गया और बीते कुछ वर्षों में महिलाओं की कुश्ती इस उत्सव का मुख्य आकर्षण बन गई।
परंपरा, ताकत और आत्मविश्वास का अनोखा संगम
अहमामऊ की महिलाएं आज भी इस सदियों पुरानी विरासत को पूरे गर्व और उत्साह के साथ संजोए हुए हैं। यहाँ दंगल के अंत में विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित जरूर किया जाता है, लेकिन हार-जीत से परे, इस परंपरा को आगे बढ़ाना और महिलाओं के आत्मविश्वास को उजागर करना ही इसका मुख्य उद्देश्य है। आधुनिक दौर में लखनऊ का यह ‘हापा’ ग्रामीण भारत में महिलाओं की ताकत और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना हुआ है।
पंकज शर्मा
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