-
Advertisement
किस्सा आश्रय काः 2019 में टिकट के लिए छोड़ दिया था पिता का साथ, आज उसी टिकट के लिए हुए “अनाथ”
मंडी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के जिस टिकट के लिए आश्रय शर्मा ने अपने पिता का साथ छोड़ दिया था, आज आश्रय शर्मा उसी टिकट से अनाथ यानी महरूम हो गए हैं। अनाथ से हमारा अभिप्राय यह है कि पार्टी ने उन्हें टिकट ना देकर पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। 2019 में आश्रय शर्मा ने चुनाव लड़ने के लिए ऐसा उत्साह दिखाया था कि कुछ समय पहले जिस पार्टी को छोड़कर वो और उनका परिवार बीजेपी में गए थे उसी पार्टी में वो अपने दादा के साथ फिर से शामिल हो गए थे। पिता अनिल शर्मा चाहकर भी अपने बेटे के साथ नहीं चल सके और उन्हें मजबूरन बीजेपी सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
यह भी पढ़ें:संजय अवस्थी का नाम फाइनल होते ही अर्की कांग्रेस में विद्रोह, 52 हुए बागी, राजेन्द्र ठाकुर ने दिया त्याग पत्र
आश्रय शर्मा ने बीजेपी प्रत्याशी स्व. राम स्वरूप शर्मा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और भयंकर मोदी लहर में वो 4 लाख 5 हजार मतों से हारे। राम स्वरूप शर्मा के देहांत के बाद खाली हुई सीट पर अब उपचुनाव होने जा रहा है। ऐसे में आश्रय शर्मा ने एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी के टिकट के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। दिल्ली दरबार में डेरा डाल दिया और मंडी में कार्यकर्ताओं के साथ भी मिलना शुरू कर दिया था। लेकिन मंडी संसदीय क्षेत्र से लोगों की भारी मांग पर पार्टी हाईकमान ने आश्रय शर्मा को दरकिनार करते हुए पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के नाम पर मुहर लगा दी। यदि वो बीजेपी में ही रहते और उस वक्त चुनाव लड़ने को लेकर अतिउत्साह न दिखाते तो शायद आज की परिस्थितियों के अनुसार वो बीजेपी के प्रत्याशी होते। लेकिन आज उनके पास ना तो कांग्रेस पार्टी का टिकट है और ना ही बीजेपी का साथ। अब ऐसे में आश्रय शर्मा एक तरह से बिल्कुल अकेले नजर आ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इन उपचुनावों में वे कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी का किस तरह से और कितना साथ देते हैं। इतना तो तय है कि उनके दादा पंडित सुखराम का आज भी सदर विधानसभा क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में जनाधार कायम है। लेकिन इस जनाधार को वे किस तरह से इस्तेमाल करते हैं, ये देखने वाली बात होगी।
हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए Subscribe करें हिमाचल अभी अभी का Telegram Channel…


