-
Advertisement
1100 दिनों से धरने पर बैठे दृष्टिहीनों का फूटा गुस्सा, बोले- मांगे पूरी नहीं कर सकते तो ज़हर दे दो
Visually Impaired: हिमाचल प्रदेश में बैकलॉग के 1,000 से अधिक रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर पिछले लगभग 1100 दिनों से सड़कों पर डटे दृष्टिहीन संघ के आंदोलनकारियों का आक्रोश अब चरम सीमा पर पहुंच गया है। राज्य सरकार की कथित बेरुखी से आहत संघ के प्रतिनिधियों ने दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली से लौटने के बाद आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार को 10 से 12 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री स्तर पर बैठक कर समाधान निकालने का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा में मांगे पूरी नहीं हुईं, तो वे भारी संख्या में एक बार फिर दिल्ली कूच करेंगे।
अब तक 4 साथियों की जान जा चुकी है
दृष्टिहीन संघ के सदस्य लक्की (रोहड़ू निवासी) ने बताया कि अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते हाल ही में उनकी जुझारू साथी सुरेखा ठाकुर का अचानक निधन हो गया। 1100 दिनों के इस लंबे संघर्ष के दौरान संघ के अब तक 4 साथियों की जान जा चुकी है।आक्रोश व्यक्त करते हुए लक्की ने कहा कि राज्य सरकार पिछले 3 वर्षों से उनसे बात करने का समय तक नहीं दे रही है। उन्होंने भावुक और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार का यही अड़ियल रवैया रहा, तो उन्हें मांगें पूरी करने के बजाय ज़हर दे दिया जाए, ताकि वे भी अपने शहीद साथियों की तरह अपनी जीवनलीला समाप्त कर सकें।
दिल्ली में रजनी पाटिल और आलाकमान के अधिकारियों से मुलाकात
प्रदेश सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम न उठाए जाने पर संघ के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली का रुख किया था। वहां उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी रजनी पाटिल ने भी कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए जुड़कर दृष्टिहीन अभ्यर्थियों का पक्ष और मांग-पत्र (चार्टर ऑफ डिमांड्स) सुना। आलाकमान की ओर से संघ को जल्द ही हिमाचल के मुख्यमंत्री के साथ उच्चस्तरीय बैठक करवाने का आश्वासन दिया गया है।
हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
संघ के सदस्य अरुण शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार न केवल दृष्टिहीन अभ्यर्थियों की अनदेखी कर रही है, बल्कि अदालत के आदेशों को भी नहीं मान रही है। उन्होंने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) ने संघ के पक्ष में निर्णय देते हुए सरकार को 1,000 से अधिक बैकलॉग पदों को तुरंत भरने के आदेश जारी किए हैं, जिस मामले में अगली सुनवाई 27 तारीख को तय की गई है।
मुख्यमंत्री से 1% भी उम्मीद नहीं”, 12 दिन बाद दिल्ली कूच की चेतावनी
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें प्रदेश सरकार और सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से अब एक प्रतिशत भी उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने कहा कि “सरकारें कहती कुछ हैं और करती कुछ हैं,” इसलिए जब तक धरातल पर फैसला नहीं दिखता, वे शांत नहीं बैठेंगे। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 10-12 दिनों के अंदर सीएम उनके साथ बैठक कर बैकलॉग भर्तियों पर निर्णय नहीं लेते हैं, तो वे दोबारा दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे।
संजू चौधरी
