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हड़तालः बैंकों के निजीकरण के खिलाफ भड़के कर्मी, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

हड़तालः बैंकों के निजीकरण के खिलाफ भड़के कर्मी, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

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सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम आफ बैंक( United Forum of Banks) के आह्वान पर हिमाचल प्रदेश में आज सभी बैंक बंद हैं। दो दिन की इस हड़ताल( strike) के पहले दिन आज बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन( Bank employees protest) कर केंद्र सरकार के इस कदम के खिलाफ खूब नारेबाजी की। प्रदेश की राजधानी शिमला में बैंक कर्मियों ने डीसी ऑफिस शिमला के बाहर प्रदर्शन किया और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूको बैंक कर्मचारी यूनियन के जनरल सेक्रेट्री नरेंद्र वर्मा ने बताया कि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार की निजीकरण के खिलाफ है। आज देश भर में दस लाख से ज्यादा बैंक कर्मी हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि पीएम कहते थे कि देश नही बिकने दूंगा लेकिन उन्होंने सबसे पहले रेल, हवाई अड्डे व अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों को बेचा है। बैंकों को निजी हाथों में देने की तैयारी है। निजी बैंकों में जनता का पैसा सुरक्षित नहीं है, यह कब दिवालिया हो जाये कहा नहीं जा सकता। 54 करोड़ जनधन खाते सरकारी बैंकों ने खोले हैं। देश की गरीब जनता तक लाभकारी योजनाओं को पहुचाने काम सरकारी बैंक करते हैं। दो दिन की हड़ताल के बाद अगर सरकार नहीं जागती है तो उसके बाद यह हड़ताल अनिश्चितकाल हो सकती है।

डिफाल्टरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग

ऊना के सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने जमकर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार को भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी। बैंक कर्मचारियों ने सरकारी क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की। इतना ही नहीं बैंक कर्मचारियों ने एक स्वर में डिफाल्टर हो चुके लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करते हुए लोन की वसूली का मामला भी उठाया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के समक्ष हुए रोष प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने अन्य मांगों को लेकर भी सरकार के समक्ष आवाज बुलंद की। बैंक कर्मचारी यूनियन के सचिव उमेश शर्मा ने कहा कि डिफाल्टर हो चुके लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करते हुए उनसे तमाम लोन की वसूली की जानी चाहिए। वही कारपोरेट जगत के बैड लोन भी वसूल किए जाने चाहिए।

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