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हिमाचल में दूसरी बार हुआ केडावेरिक ऑर्गन रिट्रीवल, 75 वर्ष की महिला ने दान की दो किडनियां-दो कॉर्निया

टांडा के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग ने रचा इतिहास, फ्लाइट के माध्यम से पीजीआई पहुंची किडनी

हिमाचल में दूसरी बार हुआ केडावेरिक ऑर्गन रिट्रीवल, 75 वर्ष की महिला ने दान की दो किडनियां-दो कॉर्निया

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धर्मशाला। जीवन व मृत्यु प्रकृति का नियम है और यह भी सच है कि हम में से हर एक व्यक्ति हमेशा जीवित रहना चाहता है,अब यह संभव है किसी और के शरीर में खुद को जीवित रखा जा सकता है एक ऐसा ही उदाहरण पेश आया है हिमाचल प्रदेश के टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (Tanda Medical College and Hospital) में जहाँ रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के तहत 75 वर्ष की महिला ने दो किडनी और दो कॉर्निया (Two Kidneys – Two Corneas) दान किए हैं टांडा मेडिकल कॉलेज में इसी साल लगातार दूसरी बार ब्रेन डेड मरीज के शरीर से अंग निकाले गए हैं जो कि पीजीआई चंडीगढ़ में प्रत्यारोपित किए गए पहली बार ऑर्गन को फ्लाइट के माध्यम से गंतव्य तक पहुंचाया गया पिछली बार की तरह इस बार भी रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ राकेश चौहान सूत्रधार बने उनके अथक प्रयासों व लगन के कारण किडनी फेलियर के मरीज को नई जिंदगी मिली है।

यह भी पढ़ें:टांडा मेडिकल कालेज में पहली बार अंगदान, एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए बनाया ग्रीन कोरिडोर

डॉ राकेश चौहान ने बताया कि सीढ़ियों से गिरने के कारण इस महिला के सिर में गहरी चोट लगी थी इसके बाद इसे टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया महिला पिछले 10 – 12 दिन से अस्पताल में दाखिल थी इलाज के दौरान हालत में सुधार नहीं हुआ तो महिला ब्रेन डेड की स्थिति में पहुंच गई अस्पताल की ब्रेन डेड सर्टिफिकेशन कमेटी ने विभिन्न टेस्ट करवाने के बाद महिला के ब्रेन डेड होने की पुष्टि की महिला के परिजनों को अंगदान के बारे में बताया गया पारिवारिक सदस्यों ने दरियादिली दिखाते हुए अपने मरीज के अंगदान करने के लिए हामी भरी वीरवार देर रात को क्रॉस मैचिंग के लिए ब्लड सैंपल कांगड़ा बस स्टैंड से बस के माध्यम से पीजीआई भेजे गए पीजीआई में किडनी फेलियर के दो मरीजों के साथ सैंपल मैच हुए क्रॉस मैचिंग होने के बाद शुक्रवार सुबह 5:00 बजे से डॉ राकेश चौहान की अध्यक्षता में किडनी व कॉर्निया रिट्रीवल ऑपरेशन शुरू हुआ ऑपरेशन करीब 8:00 बजे तक चला और सफलतापूर्वक दो किडनी और दो कॉर्निया निकाले गए सावधानीपूर्वक दोनों किडनीयों को अस्पताल से ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से कांगड़ा एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया सुबह करीब 10:30 बजे फ्लाइट टेक ऑफ हुई और दोपहर करीब 12 बजे किडनी को पीजीआई पहुंचाया गया चंडीगढ़ एयरपोर्ट से ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से कुछ ही समय में किडनी से भरे कंटेनर्स को वाहन के जरिए पीजीआई पहुंचाया गया।

पीजीआई में 2 मरीजों के शरीर में महिला की यह दोनों किडनी ट्रांसप्लांट की जा रही हैं वहीं आगामी दिनों में दो कॉर्निया टांडा मेडिकल कॉलेज में जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट कर दी जाएंगी डॉ राकेश चौहान का कहना है कि पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ आशीष शर्मा के सहयोग से दूसरी बार टांडा मेडिकल कॉलेज में सफल कैडेवरिक ऑर्गन रिट्रीवल हुआ है डॉ राकेश ने बताया कि परिजनों की सहमति के बिना अंगदान का यह महान दान संभव ना हो पाता परिजनों ने समाज के लिए मिसाल कायम करते हुए एक उदाहरण पेश किया है उन्होंने बताया कि देशभर में लाखों मरीज अंग ना मिलने के कारण मौत के मुंह में चले जाते हैं लेकिन इस महिला के जैसे महादानी ऐसे मरीजों के लिए वरदान साबित होते हैं उन्होंने कहा कि स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन हिमाचल प्रदेश हिमाचल ने भी प्रक्रिया को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया। ऑर्गन रिट्रीवल में पीजीआई से आए डॉ दीपेश कंवर और डॉ साहिल रेले ने सहयोग दिया

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रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के अध्यक्ष व विशेषज्ञ डॉ राकेश चौहान की कड़ी मेहनत से टांडा मेडिकल कॉलेज में ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर शुरू हुआ है, उनके अथक प्रयासों से हिमाचल में दूसरी बार कैडेवरिक डोनेशन हुआ, उन्होंने ऑर्गन ट्रांसप्लांट से संबंधित फोटो हिमाचल, रोटो पीजीआई से लगातार संपर्क साधा और मरीज के परिवार को अंगदान के लिए प्रेरित किया उनके प्रयासों व कड़ी मेहनत के लिए अस्पताल प्रशासन सहित पीजीआई की टीम ने उनका आभार जताया डॉ राकेश चौहान अकेले इस विभाग को सफलता पूर्वक चला रहे हैं टांडा मेडिकल कॉलेज में इसी साल मार्च महीने में 18 साल के ब्रेन डेड युवक ने अपनी किडनी और कॉर्निया दान की थी यह ऑर्गन रिट्रीवल भी रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग की ओर से हुआ था। इसमें पीजीआई की टीम ने भी सहयोग दिया था।

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