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हिमाचल को केंद्र ने दी बड़ी सौगात, मंजूर की 1300 करोड़ की HP Shiva परियोजना

यह परियोजना हिमाचल के 7 जिलों के 28 विकास खंडों को करेगी कवर

हिमाचल को केंद्र ने दी बड़ी सौगात, मंजूर की 1300 करोड़ की HP Shiva परियोजना

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शिमला। हिमाचल में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार (Central Govt) ने प्रदेश को एक बड़ी राहत दी है। हिमाचल सरकार की महत्वाकांक्षी 1300 करोड़ रुपए की हिमाचल प्रदेश उपोष्णकटिबंधीय बागवानी, सिंचाई और मूल्य वर्धन (एचपी शिवा) परियोजना (HP Shiva project ) को केंद्र ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इसे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आधीन आर्थिक मामलों के विभाग ने मंजूरी प्रदान की है। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के 7 जिलों के 28 विकास खंडों को कवर करेगी। इस परियोजना की कुल लागत 163 मिलियन अमरीकी डालर (लगभग 1300 करोड़ रुपए) होगी। इसके तहत एशियाई विकास बैंक इस परियोजना के लिए 130 मिलियन अमरीकी डालर की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा और शेष 33 मिलियन अमरीकी डॉलर हिमाचल प्रदेश सरकार (Himachal Govt) वहन करेगी। केंद्र सरकार ने यह परियोजना 5 साल यानी 2028 तक के लिए मंजूर की है।

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इस परियोजना से हिमाचल के 7 जिला (बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना) में लगभग 6000 हैक्टेयर क्षेत्र में क्रियान्वित किया जाएगा, जिससे 15000 से अधिक किसान परिवार लाभान्वित होंगे। इस परियोजना के तहत किसानों (Farmers) की निजी भूमि पर एक फसल एक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें संतरा, अमरूद, आम, लीची, परिसीमन सब ट्रॉपिकल फ्रूट्स की पैदावार को बढ़ावा दिया जाएगा। इस परियोजना में लगभग एक करोड़ फल पौध रोपण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

सीएम जयराम और बागवानी मंत्री ने जताया आभार

सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) और बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर (Mahendra Singh Thakur) ने इस परियोजना को मंजूर किए जाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार का आभार जताया है। बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्लस्टर एप्रोच में व्यावसायिक उप-उष्णकटिबंधीय बागवानी का विकास कर उन बागवानों को स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना है, जिन्होंने आवारा जानवरों, बंदरों और जंगली जानवरों के खतरे के कारण अपनी खेती योग्य भूमि को खाली छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों से युवाओं के शहरी क्षेत्र के पलायन को भी रोकने में कारगर सिद्ध होगी। इसके साथ ही यह परियोजना किसानों की आर्थिकी में भी बढ़ोतरी करेगी।

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