-
Advertisement

रावी में नारियल व मिंजर विसर्जन के साथ चंबा का ऐतिहासिक मिंजर मेला संपन्न
चंबा। हिमाचल के चंबा (Chamba) जिला में मनाए जाने वाले ऐतिहासिक मिंजर मेले (Historic Minjar Fair) का रविवार को रावी नदी में मिंजर विसर्जन की रस्म के साथ समापन हो गया। मिंजर विसर्जन से पहले अखंड चंडी पैलेस से शोभायात्रा (Shobhaa Yatra) निकाली गई। जिसमें सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) ने शोभा यात्रा में भाग लिया और पारंपरिक मान्यता अनुसार रावी नदी में मिंजर प्रवाहित किया। सीएम जयराम ठाकुर ने पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित स्थानीय लोगों, नाट्य दलों, बजंतरियों, पुलिस व गृह रक्षक बैंड और पर्यटकों के साथ निकाली गई भव्य शोभा यात्रा की आगवानी की। उन्होंने अखंड चंडी महल से मंजरी बाग तक निकाली गई भव्य शोभा यात्रा में भाग लिया और पारंपरिक मान्यता अनुसार रावी नदी में मिंजर प्रवाहित किया। लाल कपड़े में बन्धे नारियल, सिक्के और फल इत्यादि से तैयार मिंजर को रावी नदी में प्रवाहित किया गया।
यह भी पढ़ें:चंबा के मिंजर मेले को मिला अंतरराष्ट्रीय दर्जा, सीएम जयराम ठाकुर ने की घोषणा
इससे पूर्व जयराम ठाकुर ने ऐतिहासिक चंबा चौगान में कुश्ती मुकाबलों का आनंद लिया और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया। इस अवसर पर राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. हंस राज. मुख्य सचेतक बिक्रम जरयाल. विधायक पवन नैय्यर. कृषि उपज विपणन बोर्ड के अध्यक्ष डीएस ठाकुर. जिला बीजेपी अध्यक्ष जसवीर नागपाल. डीसी चंबा डीसी राणा और जिला के प्रमुख जन प्रतिनिधि सीएम के साथ शोभा यात्रा में शामिल रहे। बता दें कि सप्ताह भर चलने वाला यह मिंजर मेला (Minjar fair) आज समापन अवसर पर ऐतिहासिक बन गया। इस मिंजर मेले का जहां पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मन की बात कार्यक्रम में जिक्र किया। वहीं सीएम जयराम ठाकुर ने इसे अंतरराष्ट्रीय दर्जा देने की घोषणा की।
मिंजर मेले के बारे में यहां जाने
मिंजर चंबा का सबसे लोकप्रिय मेला है। यह मेला श्रावण महीने के दूसरे रविवार को आयोजित किया जाता है। मेला की घोषणा मिंजर के वितरण से की जाती है जो पुरुषों और महिलाओं के पहने पोशाकों के कुछ हिस्सों पर रेशम की लटकन रूप में समान रूप पहनी जाती है। यह लटकन धान और मक्का की कटाई का प्रतीक है जो वर्ष के इस समय के आसपास उनकी उपस्थिति बनाते हैं। जब ऐतिहासिक चोगान मैदान में मिंजर का झंडा फहराया जाता है तब हफ्ते भर का मेला शुरू होता है। जिसमें खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों (Sports and cultural events) का आयोजन किया जाता है। तीसरे रविवार को उल्लास, रंगीनता और उत्साह अपने अभिविन्यास तक पहुंचते हैं, जब नृत्य करने वाले मंडलियों के साथ रंगीन मिंजर जुलूस, परंपरागत रूप से स्थानीय पोशाकए पुलिस और होम गार्ड बैंड के साथ पारंपरिक ड्रम बॉटर, अपनी मार्च के लिए अखण्ड चंडी पैलेस से पुलिस लाइन के पास नलहोरा स्थल के लिए शुरू होता है। एक विशाल लोगों की भीड़ वहां पहले से इकट्ठा होती है। पहले राजा और अब प्रदेश के सीएम एक नारियल, एक रुपया, एक मौसमी फल और एक मिंजर जो लाल रंग के कपड़े में बंधे होते हैं -लोहान नदी में चढ़ाते हैं। इसके बाद सभी लोग नदी में अपने मिंजरों को चढ़ाते हैं। पारंपरिक कुंजरी-मल्हार को स्थानीय कलाकारों द्वारा गाया जाता है। मिंजर मेला हिमाचल प्रदेश के राज्य मेलों में से एक मेले के रूप में घोषित किया गया है। जबकि इस बार इस मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा देने की घोषणा सीएम जयराम ठाकुर ने की है।
हिमाचल और देश-दुनिया के ताजा अपडेट के लिए like करे हिमाचल अभी अभी का facebook page
हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए join करें हिमाचल अभी अभी का Whats App Group…